वक्फ संशोधन विधेयक पर सियासी घमासान: यूपी में सतर्कता बढ़ी, पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द

लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन विधेयक पेश किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस विधेयक के मद्देनजर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को सख्त कर दिया गया है। बरेली, अलीगढ़, रामपुर और मेरठ जैसे संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रशांत कुमार ने ऐलान किया कि अगले आदेश तक पुलिसकर्मियों की सभी छुट्टियां निरस्त कर दी गई हैं।
विधेयक को लेकर सियासी टकराव
विधेयक को लेकर राज्य में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जहां इस विधेयक को ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) ने इसे पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया है।
भाजपा नेता मोहसिन रजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “यह विधेयक पिछड़े और अतिपिछड़े मुस्लिम समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह पीएम मोदी की ओर से उन्हें सबसे बड़ी ‘ईदी’ होगी।” उन्होंने इस विधेयक को मुस्लिम समाज के वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए आवश्यक बताया।
समाजवादी पार्टी का कड़ा विरोध
सपा अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का विरोध करेगी। उन्होंने कहा, “जिस समुदाय के लिए यह विधेयक लाया जा रहा है, उसकी ही बातों को सरकार महत्व नहीं दे रही है। इससे बड़ा अन्याय और क्या हो सकता है? यह विधेयक संविधान के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है, इसलिए समाजवादी पार्टी इसे स्वीकार नहीं कर सकती।”
सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने भी इसे पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए इसके खिलाफ संघर्ष का ऐलान किया। वहीं, संभल से सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने भी इस विधेयक पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “हम पहले से ही इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। जब इसे पहली बार सदन में लाया गया था, तब भी हमारी पार्टी ने इसका पुरजोर विरोध किया था। यह सिर्फ भाजपा-एनडीए सरकार का विधेयक नहीं है, बल्कि यह मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों को सीमित करने वाला कानून है।”
जेपीसी रिपोर्ट पर उठे सवाल
सपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि इस विधेयक को ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (जेपीसी) को भेजने की प्रक्रिया सिर्फ एक औपचारिकता थी। सांसद बर्क ने कहा, “हमें उम्मीद थी कि कमेटी इसमें जरूरी सुधार करेगी, लेकिन रिपोर्ट भी सरकार की मर्जी के मुताबिक पेश की गई। यह विधेयक अगर पास होता है, तो हमारे अधिकारों का हनन होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार के पास बहुमत जरूर है, लेकिन इसके सहयोगी दल भी जानते हैं कि अगर उन्होंने इस विधेयक का समर्थन किया तो उन्हें राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा। बर्क ने सरकार से आग्रह किया कि वह तानाशाही रवैया छोड़कर इस विधेयक को वापस ले।
यूपी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
विधेयक पर उठे विवाद को देखते हुए यूपी में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन ने संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरतने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। डीजीपी प्रशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
आगे की राह
विधेयक को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। जहां भाजपा इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे समुदाय विशेष के खिलाफ बता रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सदन में इस विधेयक को लेकर क्या रुख अपनाया जाता है और क्या सरकार इसमें कोई संशोधन करने पर विचार करेगी या नहीं।
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