पंजाब के मोहाली जिले के जीरकपुर की एक महिला के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिए गए चर्च पादरी बजिंदर सिंह को अदालत ने ताउम्र कैद की सजा सुनाई है। इस फैसले के साथ ही पीड़िता और उसके परिवार ने राहत की सांस ली। अदालत के फैसले के बाद पुलिस ने पादरी को हिरासत में लेकर पटियाला जेल भेज दिया।
‘पापा जी’ कहलाने वाला पादरी निकला दरिंदा
पीड़िता के वकील एडवोकेट अनिल सागर ने कहा कि दोषी पादरी बजिंदर सिंह एक आध्यात्मिक गुरु के रूप में लोगों के बीच लोकप्रिय था। उसके अनुयायी उसे ‘पापा जी’ कहकर बुलाते थे। लेकिन जब इस तरह के धर्मगुरु ही अमानवीय अपराधों में लिप्त पाए जाते हैं, तो उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो अन्य पीड़ितों के लिए भी मिसाल बनेगा।
फैसला सुनते ही बेहोश हुई पीड़िता, बाद में जताई खुशी
अदालत के फैसले के बाद पीड़िता की भावनाएं उमड़ पड़ीं। वह कोर्टरूम में ही बेहोश हो गई। कुछ देर बाद होश में आने पर उसने कहा कि उसे अदालत पर पूरा भरोसा था। इस फैसले से उसने न केवल खुद के लिए, बल्कि उन सभी पीड़ित महिलाओं के लिए न्याय हासिल किया है, जो अब तक अपने दर्द को सहते आ रही थीं।
विदेश भागने की फिराक में था पादरी, एयरपोर्ट से हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने पादरी बजिंदर सिंह को दिल्ली एयरपोर्ट से उस समय गिरफ्तार किया था, जब वह इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित एक सेमिनार में शामिल होने के लिए रवाना हो रहा था। इस गिरफ्तारी के बाद जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
मारपीट का वीडियो भी हुआ था वायरल
सोशल मीडिया पर पादरी बजिंदर सिंह का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें वह एक महिला के साथ मारपीट करता नजर आ रहा था। यह वीडियो 14 फरवरी का था, जो 16 मार्च को वायरल हुआ। वीडियो में देखा गया कि पादरी ने महिला को थप्पड़ मारा और उसके मुंह पर कॉपी फेंक दी। पीड़िता ने बताया कि यह महिला पादरी के पास काम करती थी। यह वीडियो सामने आने के बाद पादरी के काले कारनामे उजागर होने लगे।
‘अगर वह बाहर आया तो फिर करेगा अपराध’ – पीड़िता
अदालत के फैसले के बाद मीडिया के सामने आई पीड़िता ने कहा कि दोषी पादरी बजिंदर सिंह एक साइको अपराधी है। यदि उसे जेल से बाहर आने का मौका मिला, तो वह फिर से अपराध करेगा। इसलिए उसे अपनी आखिरी सांस तक जेल में ही रहना चाहिए।
‘मेरी अकेले की नहीं, सभी पीड़ितों की जीत’
पीड़िता ने कहा, “यह मेरी अकेले की जीत नहीं है, बल्कि उन सभी लड़कियों और लड़कों की जीत है, जो अब तक इस दरिंदे के चंगुल में थे। अब कई और पीड़ित हिम्मत जुटाकर सामने आएंगे। इस फैसले के बाद कई लोग बजिंदर सिंह के जाल से मुक्त होंगे।”
पीड़िता ने मांगी सुरक्षा
पीड़िता ने पंजाब पुलिस के डीजीपी से अनुरोध किया कि उन्हें और उनके पति को सुरक्षा दी जाए। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में उन पर हमले हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके और उनके परिवार के खिलाफ झूठे केस दर्ज करवाने की साजिश रची जा सकती है, जैसा कि पहले भी किया गया था।
न्याय की मिसाल बना अदालत का फैसला
मोहाली की अदालत का यह फैसला उन तमाम लोगों के लिए एक संदेश है, जो अपनी ताकत का दुरुपयोग कर मासूमों के साथ अमानवीय कृत्य करते हैं। यह न्याय व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है और समाज में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Discussion about this post