झारखंड के साहेबगंज जिले में मंगलवार तड़के एक दर्दनाक रेल हादसा हुआ, जिसमें दो मालगाड़ियों के बीच भीषण टक्कर हो गई। इस हादसे में दो लोको पायलट की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए। घटना के बाद रेलवे प्रशासन और राहत दल तुरंत हरकत में आ गए, लेकिन टक्कर के कारण लगी आग ने स्थिति को और भयावह बना दिया।
कैसे हुआ हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा बरहेट थाना क्षेत्र के भोगनाडीह के पास मंगलवार सुबह करीब 3:30 बजे हुआ। राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) की ओर से संचालित एक मालगाड़ी फरक्का से ललमटिया की ओर जा रही थी, जब वह बरहेट में पहले से खड़ी दूसरी मालगाड़ी से जा टकराई।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों ट्रेनों के लोको पायलटों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद इंजन और कोयले से भरी बोगियों में आग लग गई। आग की सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
मारे गए लोको पायलट और घायलों की पहचान
इस हादसे में मारे गए लोको पायलटों की पहचान बोकारो निवासी अंबुज महतो और पश्चिम बंगाल के बीएस मॉल के रूप में हुई है। इसके अलावा, इस दुर्घटना में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के चार जवान भी घायल हुए हैं। घायलों को बरहेट सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
एनटीपीसी की मालगाड़ियों के बीच टक्कर
पूर्वी रेलवे के प्रवक्ता कौशिक मित्रा ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त मालगाड़ी और ट्रैक दोनों ही एनटीपीसी के स्वामित्व में हैं। इस हादसे का भारतीय रेलवे से कोई संबंध नहीं है। यह रेल लाइन बिहार के भागलपुर जिले में स्थित एनटीपीसी के कहलगांव सुपर थर्मल पावर स्टेशन को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्थित फरक्का पावर प्लांट से जोड़ती है। इस ट्रैक का उपयोग मुख्य रूप से एनटीपीसी के बिजली संयंत्रों के लिए कोयला परिवहन करने के लिए किया जाता है।
स्थानीय लोगों ने बताया भयावह मंजर
स्थानीय लोगों के अनुसार, हादसा इतना भयानक था कि टक्कर के बाद दोनों मालगाड़ियां पटरी से उतर गईं। एक ट्रेन का इंजन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और बोगियों में आग लग गई। आग लगने के बाद पूरे इलाके में धुएं का गुबार छा गया। राहत और बचाव दल के मौके पर पहुंचने के बाद आग पर काबू पाने की कोशिशें शुरू की गईं।
रेलवे सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे ने रेलवे सुरक्षा मानकों पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मालगाड़ियों के संचालन में किसी तकनीकी गड़बड़ी या मानवीय चूक के कारण यह दुर्घटना हुई होगी। मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
ओडिशा में भी हुआ था बड़ा रेल हादसा
गौरतलब है कि इससे पहले रविवार को ओडिशा के कटक जिले में भी एक बड़ा रेल हादसा हुआ था, जिसमें बंगलूरू-कामाख्या एक्सप्रेस के 11 डिब्बे पटरी से उतर गए थे। इस दुर्घटना में एक यात्री की मौत हो गई थी, जबकि सात अन्य घायल हुए थे।
राहत और बचाव कार्य जारी
साहेबगंज में हुए इस हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है। प्रशासन ने जांच कमेटी गठित कर हादसे के कारणों का पता लगाने के आदेश दिए हैं। रेलवे और एनटीपीसी अधिकारियों की टीमें घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही हैं।
इस दुर्घटना ने रेल सुरक्षा उपायों की समीक्षा की आवश्यकता को फिर से उजागर कर दिया है। उम्मीद की जा रही है कि इस हादसे से सबक लेकर भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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