छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता भूपेश बघेल के रायपुर और भिलाई स्थित आवासों पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम ने छापा मारा। यह कार्रवाई 20,000 करोड़ रुपये के महादेव सट्टा ऐप घोटाले की जांच के तहत की गई। सीबीआई की टीम ने शनिवार सुबह करीब 5:30 बजे बघेल के अलावा चार पुलिस अधिकारियों के आवासों पर भी दबिश दी।
किनके आवासों पर हुई कार्रवाई?
CBI ने भूपेश बघेल के अलावा छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा है। दबिश जिनके घरों पर दी गई, उनमें शामिल हैं:
एडिशनल एसपी अभिषेक माहेश्वरी
आईपीएस अधिकारी अभिषेक पल्लव
आईपीएस अधिकारी आरिफ शेख
आईपीएस अधिकारी आनंद छाबड़ा
इसके अलावा, पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा और कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के आवासों पर भी जांच एजेंसी ने छापा मारा।
क्या है महादेव सट्टा ऐप घोटाला?
महादेव सट्टा ऐप घोटाले में कथित तौर पर 20,000 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई है। इस मामले में कांग्रेस सरकार के कुछ अधिकारियों की भूमिका होने की बात सामने आई थी। इसके अलावा, भूपेश बघेल पर भी 500 करोड़ रुपये के लेन-देन का आरोप लगाया गया है।
इससे पहले, महादेव सट्टा ऐप के संचालक शुभम सोनी ने एक वीडियो जारी कर पूर्व मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए थे। ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने भी इस घोटाले की जांच के तहत 10 मार्च को दुर्ग जिले में 14 स्थानों पर छापेमारी की थी, जिसमें बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल के आवास भी शामिल थे।
भूपेश बघेल ने क्या कहा?
CBI की छापेमारी के बाद भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने कार्यालय के हवाले से ट्वीट किया:
“अब CBI आई है। आगामी 8 और 9 अप्रैल को अहमदाबाद (गुजरात) में होने वाली AICC की बैठक के लिए गठित ‘ड्राफ्टिंग कमेटी’ की मीटिंग में भाग लेने के लिए आज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का दिल्ली जाने का कार्यक्रम था। उससे पहले ही CBI रायपुर और भिलाई निवास पहुंच चुकी है।”
कांग्रेस ने किया विरोध
कांग्रेस पार्टी ने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया। पार्टी के छत्तीसगढ़ संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा:
“बीजेपी की मोदी सरकार ने कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आवास पर सीबीआई भेजी है। यह स्पष्ट रूप से राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है।”
ईडी की पहले की गई कार्रवाई
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी महादेव सट्टा ऐप घोटाले के सिलसिले में छापेमारी की थी। 10 मार्च को दुर्ग जिले में हुई इस कार्रवाई में बघेल और उनके बेटे के करीबी माने जाने वाले लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल से जुड़े स्थानों की भी तलाशी ली गई थी।
राजनीतिक हलचल तेज
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस छापेमारी के बाद भूचाल आ गया है। कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
अब इस मामले में आगे क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या भूपेश बघेल और उनके सहयोगियों पर कानूनी शिकंजा कसता है या यह मामला राजनीति की भेंट चढ़ जाता है? यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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