दक्षिण कोरिया की संवैधानिक अदालत ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसले में प्रधानमंत्री हान डक-सू के महाभियोग को खारिज कर दिया और उनकी शक्तियों को बहाल करने का निर्णय लिया। यह फैसला देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है, क्योंकि दो महीने पहले उन्हें महाभियोग के तहत निलंबित कर दिया गया था।
महाभियोग की पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री हान डक-सू ने राष्ट्रपति यून सूक येओल की अनुपस्थिति में कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला था। राष्ट्रपति यून पर पिछले वर्ष अल्पकालिक मार्शल लॉ लागू करने के कारण महाभियोग चलाया गया था, जिसके बाद हान को कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया गया। हालांकि, उनके कार्यकाल के दौरान विपक्षी दलों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी रही।
संसद और हान के बीच टकराव
प्रधानमंत्री हान को महज दो सप्ताह से भी कम समय तक कार्य करने का अवसर मिला था। 27 दिसंबर को उन्होंने संवैधानिक न्यायालय में तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से इनकार कर दिया था। इसके चलते विपक्ष के नेतृत्व वाली संसद ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया और उन्हें निलंबित कर दिया। हालांकि, संवैधानिक अदालत ने उनके खिलाफ लाए गए आरोपों को अस्वीकार कर दिया और सात-एक के बहुमत से उनके महाभियोग को खारिज कर दिया।
हान डक-सू का राजनीतिक सफर
75 वर्षीय हान डक-सू दक्षिण कोरिया के एक अनुभवी राजनेता हैं, जिन्होंने विभिन्न सरकारों के तहत तीन दशकों से अधिक समय तक नेतृत्व की भूमिका निभाई है। वे रूढ़िवादी और उदारवादी दोनों ही सरकारों के साथ काम कर चुके हैं। बावजूद इसके, विपक्ष ने उन्हें राष्ट्रपति यून द्वारा घोषित मार्शल लॉ को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया, जिसे हान ने खारिज कर दिया था।
संवैधानिक अदालत का निर्णय और संभावित प्रभाव
संवैधानिक अदालत ने सोमवार को यह फैसला सुनाया कि हान के महाभियोग को हटाया जाना चाहिए और उन्हें पुनः अपने पद पर कार्य करने की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने अभी तक राष्ट्रपति यून सूक येओल के महाभियोग पर कोई फैसला नहीं सुनाया है। यदि अदालत यून के खिलाफ महाभियोग को सही ठहराती है, तो दक्षिण कोरिया में नए राष्ट्रपति के लिए चुनाव कराने होंगे। वहीं, यदि फैसला यून के पक्ष में जाता है, तो उन्हें अपने राष्ट्रपति पद की शक्तियां वापस मिल जाएंगी।
विपक्ष की भूमिका और राजनीतिक उथल-पुथल
दक्षिण कोरिया की मुख्य विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री हान डक-सू के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि हान ने राष्ट्रपति यून के मार्शल लॉ के समर्थन में काम किया और उनके खिलाफ जांच को मंजूरी नहीं दी। इसके चलते संसद में उनके खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया गया था। हालांकि, संवैधानिक अदालत के फैसले ने इस मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
आगे की राह
इस निर्णय से दक्षिण कोरिया की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संवैधानिक अदालत राष्ट्रपति यून के मामले में क्या फैसला सुनाती है। यदि यून के पक्ष में फैसला आता है, तो वे फिर से अपनी शक्तियों के साथ शासन कर सकेंगे, अन्यथा देश को नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए तैयार रहना होगा।
दक्षिण कोरिया की यह घटनाक्रम न केवल देश के आंतरिक राजनीतिक ढांचे को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी इसकी गूंज सुनाई देगी।
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