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दिल्ली में सभी को मुफ्त बिजली नहीं, केजरीवाल लागू करेंगे ‘मोदी मॉडल’

दिल्ली। दिल्ली में सस्ती बिजली वैकल्पिक होगी यानी अगर कोई बिजली उपभोक्ता बिजली सब्सिडी चाहता है तो उसको अभी की तरह सब्सिडी वाली मुफ्त या रियायती दर वाली बिजली मिलेगी। लेकिन अगर कोई खुद को सक्षम समझता है तो वह दिल्ली सरकार को बता सकता है कि उसको बिजली सब्सिडी नहीं चाहिए और वह सामान्य दर वाली बिजली इस्तेमाल कर सकता है।

दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि हम लोगों को ऑप्शन देंगे कि बिजली सब्सिडी की आपको जरूरत है या नहीं। जो लोग नहीं चाहेंगे, उन्हें बिजली की सब्सिडी नहीं मिलेगी। यानी सभी को फ्री बिजली नहीं मिलेगी। केजरीवाल ने बताया कि उन्हें कई लोग मिलते हैं, जो कहते हैं कि हमें बिजली सब्सिडी नहीं चाहिए। आप इस पैसे का इस्तेमाल स्कूल खोलने, अस्पताल बनाने में करें। इसी के बाद दिल्ली सरकार ने ये फैसला लिया है। अब हम लोगों से पूछेंगे कि क्या उन्हें बिजली की सब्सिडी चाहिए? अगर वे कहेंगे कि चाहिए तो हम देंगे और वे कहेंगे कि नहीं चाहिए तो हम नहीं देंगे।

पीएम मोदी का ‘गिव इट अप’ कार्यक्रम
साल 2015 में मार्च के महीने में हुए अंतरराष्ट्रीय एनर्जी समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सब्सिडी छोड़ो अभियान की शुरुआत की थी उसके बाद से कुछ लोगों ने स्वतः ही इसका उपभोग करना छोड़ दिया। पीएम ने इस दौरान कहा था कि जो लोग समृद्ध हैं, जिन्हें जरूरत नहीं उन्हें सब्सिडी नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने उन लोगों का भी धन्यवाद किया जिन्होंने सब्सिडी लेने से मना कर दिया है।

केंद्र सरकार ने लोगों को प्रेरित करने के लिए givitup.in वेबसाइट के जरिए इस अभियान से लोगों को जोड़ना शुरू किया। इसकी शुरुआत के बाद से 9 अप्रैल 2015 की दोपहर तक 3,23,822 लोगों ने अपने एलपीजी गैस सिलिंडर पर सब्सिडी नहीं लेने का फैसला करते हुए आवेदन डाला। इस क्रम में केन्द्र सरकार ने यह आंकड़ा भी जारी किया था कि ‘गिव इट अप’ कार्यक्रम के चलते केन्द्र सरकार को 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है।

बता दें कि दिल्ली में सत्ता में आने के बाद से आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा दिल्लीवासियों को 200 यूनिट तक फ्री बिजली दी जा रही है। उपभोक्ताओं को वर्तमान में 200 यूनिट तक कोई बिल नहीं भरना होता है, जबकि प्रति माह 201 से 400 यूनिट बिजली की खपत पर 800 रुपये की सब्सिडी मिलती है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को बड़ी राहत मिल रही है। साथ ही मध्यम वर्ग के लोगों को भी इसका लाभ मिल रहा है।

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