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यूपी की 36 एमएलसी सीटों पर भी चुनाव का ऐलान, जानिए कौन डाल सकता है वोट?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के साथ ही विधान परिषद (एमएलसी) की 36 सीटों के लिए भी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो गई है। 35 स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्रों के 36 सदस्यों का कार्यकाल सात मार्च को पूरा हो रहा है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) अजय कुमार शुक्ला की ओर से जारी चुनाव कार्यक्रम के अनुसार मतदान दो चरणों में होगा।

35 स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्रों की 36 विधान परिषद सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव दो चरणों में तीन और सात मार्च को होंगे। 12 मार्च को इन MLC के चुनावों का परिणाम घोषित किया जाएगा। पहले चरण की अधिसूचना 4 फरवरी को जारी की जाएगी, जबकि 11 फरवरी को नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है। नामांकन पत्रों की जांच 14 फरवरी को होगी और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 16 फरवरी है। मतदान 3 मार्च को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा।

पहले चरण में मुरादाबाद-बिजनौर, रामपुर-बरेली, बदायूं, पीलीभीत-शाहजहांपुर, हरदोई, खीरी, लखनऊ-उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, बाराबंकी, बहराइच, आजमगढ़-मऊ, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर-सोनभद्र, इलाहाबाद, बांदा-हमीरपुर, झांसी-जालौन-ललितपुर, कानपुर-फतेहपुर, इटावा-फरुखाबाद, आगरा-फिरोजाबाद, मथुरा-एटा-मैनपुरी, अलीगढ़, बुलंदशहर, मेरठ-गाजियाबाद और मुजफ्फरनगर-सहारनपुर में मतदान होगा।

दूसरे चरण में गोंडा, फैजाबाद, बस्ती-सिद्धार्थनगर, गोरखपुर-महाराजगंज, देवरिया और बलिया में वोट डाले जाएंगे। दूसरे चरण की अधिसूचना 10 फरवरी को जारी की जाएगी, जबकि 17 फरवरी को नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है। 18 फरवरी को नामांकनों की जांच होगी और 21 फरवरी को नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है।

कैसे चुने जाते हैं विधान परिषद के सदस्य
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में 100 सीटें हैं। विधान परिषद में एक निश्चित संख्या तक सदस्य होते हैं। विधानसभा के एक तिहाई से ज्यादा सदस्य विधान परिषद में नहीं होने चाहिए।मसलन यूपी में 403 विधानसभा सदस्य हैं यानी यूपी विधान परिषद में 134 से ज्यादा सदस्य नहीं हो सकते हैं। इसके अलावा विधान परिषद में कम से कम 40 सदस्य होना जरूरी है।बता दें कि MLC का चुनाव जनता द्वारा न होकर अप्रत्यक्ष रूप आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार होता है। विधान परिषद के एक तिहाई सदस्यों को विधायक चुनते हैं। इसके अलावा एक तिहाई सदस्यों को नगर निगम, नगरपालिका, जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के सदस्य चुनते हैं।

MLA और MLC में अंतर
MLA और MLC दोनों ही विधानमंडल के सदस्य हैं और विधि निर्माण का कार्य करते हैं। दोनों को कुछ विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं और दोनों ही मंत्री बन बन सकते हैं। MLA किसी राज्य की विधान सभा का सदस्य होता है जबकि MLC किसी विधान परिषद् का सदस्य होता है। राजयपाल द्वारा विधान परिषद् में कई व्यक्तियों जो विज्ञान, कला, खेल, साहित्य आदि क्षेत्रों में विशिष्ट योग्यता रखते हैं को मनोनीत किया जाता है। MLC का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। MLC बनने की न्यूनत्तम आयु 30 वर्ष है।

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