मेरा गाज़ियाबाद

गाजियाबाद की शान बढ़ाएगा पाकिस्तान को धूल चटाने वाला टी-55 टैंक, आज हुआ लोकार्पण

गाजियाबाद। 1971 की लड़ाई में पाकिस्तान की शिकस्त में शामिल टी-55 टैंक अब गाजियाबाद की शान बढ़ाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री और सांसद जनरल वीके सिंह के प्रयास से रक्षा मंत्रालय ने यह टैंक गाजियाबाद को दिया है। 

भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध में देश को जीत मिलने के साथ ही बंगलादेश अलग बनने के दौरान देश के वीर सैनिकों की जांबाजी के साथ ही दुश्मनों को धूल चटाने में युद्धक टैंक की भूमिका महत्वपूर्ण रही। जवानों ने वीरता का परिचय देते हुए पाकिस्तानी फौजियों को खदेड़ दिया था। भारतीय सेना के  पराक्रम के आगे पाकिस्तानी सेना के 93,000 सैनिकों ने घुटने टेक कर आत्मसमर्पण किया था। भारत की वीरता के गवाह रहे इस टैंक को गाजियाबाद के लोग अब बेहद करीब से देख सकेंगे। इसको नगर निगम ने मेरठ तिराहा स्थित नया बस अड्डा मेट्रो स्टेशन के सामने ‘युद्धक ट्रॉफी’ के रूप में स्थापित किया है। आज इसका लोकार्पण किया गया।

जनरल वीके सिंह के अनुसार, 1971 में भारत-पाक के बीच युद्ध हुआ। इसमें हमारे टैंक टी-55 ने पश्चिम मोर्चे पर बसंतर और बारपिड़ की लड़ाई में पाकिस्तान के टैंक बड़ी संख्या में नष्ट किए। इसके बाद टी-55 को सेना से रिटायर हो गया। जनरल ने बताया कि कुछ दिन पूर्व ही टैंक गाजियाबाद आ गया था। इसके लिए रक्षा मंत्रालय की तमाम जटिल प्रक्रियाओं को पूरा किया गया।

वीके सिंह ने बताया कि गाजियाबाद का बहुत पुराना इतिहास है। यहां के कई लोगों ने 1857 की क्रांति में हिस्सा लिया था। यह गाजियाबाद का सबसे पुराना शहीद स्थल है। इसे यादगार स्थल बनाने के लिए टैंक को रखा गया है, इससे युवाओं को प्रेरणा भी मिलेगी।चीन से सीमा विवाद पर केंद्रीय राज्य मंत्री वीके सिंह ने कहा कि पैगोंग लेक पर चाइना सड़क बना रहा है। अगर वो बना रहा है तो उनको बनाने दीजिए जब तक वो हमारे देश में नहीं आता तब तक जो मर्जी अपनी सीमा में रहकर करे, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। उधर, आर्मी टैंक को टैंक को देखने को विशेषकर युवा खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं। कुछ युवा तो टैंक के भीतर जाकर भी सेल्फी ले रहे हैं।

टी-55 टैंक का निर्माता सोवियत यूनियन
टी-55 टैंक को भारतीय सीमा पर सजग प्रहरी कहा जाता था। 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में टी-55 टैंक को भारत-पाक सीमा के पंजाब-राजस्थान बॉर्डर पर तैनात किया गया था। टी-55 टैंक का निर्माण सबसे पहले 1946 से 1981 के बीच सोवियत यूनियन ने किया था। 1956 से 1989 के बीच पोलैंड ने भी टी-55 मॉडल के टैंक का निर्माण किया। दोनों देशों की तर्ज पर 1957 से 1983 के बीच चेकोस्लोवाकिया में भी टी-55 मॉडल का निर्माण हुआ था।

टैंक की लंबाई नौ मीटर, चौड़ाई 3.7 मीटर और ऊंचाई 2.40 मीटर है। इसका वजन करीब 36 हजार किलो है। इसमें चार क्रू मेंबर बैठते हैं। मुख्य गन 100 एमएमडी 10-टी झीरी और गन और माध्यमिक गन 12.5 एमएम मशीन गन से लैस रहती है। इसमें एंटी एयरक्राफ्ट गन भी लगी होती है। यह टैंक 14 किलोमीटर दूरी तक प्रहार करने की क्षमता रखता है।

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