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महेंद्र भाटी हत्याकांड: डीपी यादव के बाद जेल में बंद भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रनीत भाटी भी बरी

देहरादून/दादरी। नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के दादरी से पूर्व विधायक रहे महेंद्र भाटी हत्याकांड के आरोपी भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रनीत भाटी को भी बरी कर दिया है। मामले में डीपी यादव, करन यादव, लक्कड़ पाला सिंह को कोर्ट पहले ही बरी कर चुका है। इस मामले में अब सभी आरोपी बरी हो चुके हैं।

13 सितंबर 1992 को गाज़ियाबाद के पूर्व विधायक महेंद्र भाटी की दादरी रेलवे क्रासिंग पर गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप डीपी यादव समेत परनीत भाटी, करण यादव, पाल सिंह पर था, इस पूरे मामले की सीबीआई ने जांच कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई तो 15 फरवरी 2015 में देहरादून में सीबीआई कोर्ट ने सभी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी। इन सभी ने सीबीआई कोर्ट की सजा को हाई कोर्ट में चुनौती दी है जिस पर हाई कोर्ट ने सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रखा था।

वहीं आज कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रनीत भाटी रिहा करने के आदेश दिए। खण्डपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि ट्रायल के दौरान सीबीआई इनके खिलाफ पर्याप्त सबूत जुटाने में असमर्थ रही जो भी सबूत जुटाए गए थे उनमें भी विरोधाभास रहा है। प्रनीत के अलावा उनके पिता और भाई भी भाजपा में जिलाध्यक्ष रह चुके है। उसके बाद प्रदेश महामंत्री किसान मोर्चा का दायित्व संभाल चुके हैं।

खण्डपीठ ने प्रनीत भाटी को संदेह का लाभ देते हुए उन्हें दोषमुक्त कर दिया। वहीं खण्डपीठ ने सजा को बढ़ाये जाने को लेकर दायर नीतीश भाटी की याचिका को निरस्त कर दिया है। जबकि मुख्य आरोपी डीपी यादव , लक्कड़ पाल व करन यादव पहले इस केस से दोषमुक्त हो चुके है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश आरएस चौहान व न्यायमुर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में हुई।

कभी दोस्त रहे थे महेंद्र व डीपी यादव
दादरी तहसील के गांव मकोड़ा निवासी महेंद्र ने आगरा के सेंट जैन्स में शिक्षा हासिल कर गाजियाबाद में वकालत की थी। उस दौरान उन्होंने राजनीतिक यात्रा कांग्रेस से शुरू की थी। उस दौरान महेंद्र की डीपी यादव से दोस्ती हो गई थी। डीपी यादव उन्हें राजनीतिक गुरु मानने लगे थे। महेंद्र ने 1988 में डीपी यादव को बिसरख ब्लॉक का प्रमुख बनवा दिया। 1989 में करीबी नरेंद्र भाटी को सिकंदराबाद और डीपी यादव को बुलंदशहर से विधायक का टिकट दिलवाया। वे खुद दादरी विधानसभा से चुनाव लड़ रहे थे। क्षेत्र में दो लाख मतदाता थे, जिसमें से एक लाख मतदाता अकेले गुर्जर बिरादरी के थे।

बुलंदशहर चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद
1991 के विधानसभा चुनाव में महेंद्र सिंह भाटी ने बुलंदशहर से डीपी यादव के सामने पतवाड़ी गांव के प्रकाश पहलवान को जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़वाया था। इस चुनाव में जमकर गोलीबारी हुई थी। दोनों तरफ से छह-सात लोग मारे गए थे। डीपी यादव चुनाव हारते-हारते बचे थे। यहीं से दुश्मनी और बढ़ गई थी।

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