उद्योगमेरा गाज़ियाबाद

राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस: वायु प्रदूषण बना बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र की पहचान

गाजियाबाद। हर साल 2 दिसंबर को राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किये जाते हैं लेकिन बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण पर कोई कार्य दिख नहीं रहा है। प्रदूषण ने यहाँ की आबोहवा का बेड़ा गर्क कर दिया है। जर्जर सड़क पर औद्योगिक क्षेत्र की गाड़ी कैसे दौड़ेगी, यह उद्यमियों की समझ में नहीं आ रहा है। उद्योग बंधु की बैठक में अक्सर ही खराब सड़कों का मुद्दा उठाया जा रहा है लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। जबकि यहाँ विशेष निगरानी की जरूरत है, यही कारण है कि वायु प्रदूषण ही इस इलाके की पहचान बन गया है।

बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र में लघु और मध्यम तथा बड़ी औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं लेकिन हजारों-करोड़ों के कारोबार और सरकार को राजस्व के बीच यहाँ न तो ढंग की सुविधाएं हैं और न ही भविष्य में मिलने की उम्मीद है। यहाँ सड़कें खस्ताहाल हो चुकी हैं और इन सड़कों से अब लगातार धूल-मिट्टी उड़ रही है, सड़क के नाम पर बस धूल और गड्डे ही बचे हैं।

जर्जर सड़क से पूरे दिन धूल उड़ती है। कोई भी बड़ा या छोटा वाहन तेज रफ्तार में निकलता है तो पूरा इलाका धूल से सराबोर हो जाता हैं। बड़े-बड़े गड्ढों के साथ मिट्टी और गिट्टियां इधर-उधर बिखरी हुई है। इससे डीजल वाले वाहनों के धुएं से निकलने वाला सल्फर, कार्बन मोनोआक्साइड व अन्य हानिकारक गैसें वातावरण में प्रदूषण को बढ़ा रही हैं।

यहाँ धूल से सनी जर्जर सड़कों पर 24 घंटे ट्रांसपोर्टिंग के कारण पेड़-पौधों की हरियाली खत्म हो गयी है। इससे रोड किनारे लगे पेड़-पौधों की पत्तियां भी मटमैली हो चुकी हैं। प्रदूषण के कारण धूलकणों से सूरज की किरणें भी फीकी नजर आती है। इन सब के बीच जिम्मेवार इस बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर उदासीनता का रवैया अपना रहे है।

शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव
चिकित्सकों के मुताबिक धूल से अस्थमा के अटैक व सीओपीडी (क्रॉनिक आब्सट्रक्टिव लंग डिजीज) का रोग भी बढ़ रहा है। धूल के कण फेफड़ों को कमजोर करते हैं, जिससे उनकी सक्रियता घट जाती है। यह सांस की दिक्कत के साथ टीबी को भी जन्म दे सकते हैं। आंखों में कंजेक्टिवाइटिस की शिकायत हो जाती है। धूल के कण फेफड़ों में पहुंचने के साथ ही नाक व आंख में जाते हैं जिससे एलर्जिक राइनाइटिस तथा एलर्जिक कंजेक्टिवाइटिस की समस्या पैदा होती है। एलर्जिक राइनाइटिस में नाक बहने लगती है या बंद हो जाती है।

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