Monday, November 29, 2021
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कंगना के ‘भीख में आजादी’ वाले बयान का अभिनेता विक्रम गोखले ने किया समर्थन

मुंबई। अभिनेत्री कंगना रणौत भारत की आजादी को लेकर दिए गए बयान को लेकर चर्चा में हैं। दरअसल, कंगना रनौत ने बीते गुरुवार को कहा था कि भारत को ‘असली आजादी’ 2014 में मिली, जब नरेंद्र मोदी सरकार सत्ता में आई, उन्होंने कहा कि 1947 में देश को जो स्वतंत्रता मिली थी वह ‘भीख’ में मिली थी। इस बयान के बाद कंगना रनौत की की काफी आलोचना हो रही है। 

इसी बीच दिग्गज मराठी अभिनेता विक्रम गोखले ने बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रणौत के विवादास्पद बयान का रविवार को समर्थन किया। महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में गोखले ने कहा कि रणौत ने जो कहा था वह सच है। गोखले को मराठी थिएटर, बॉलीवुड और टीवी पर अभिनय के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समेत हर राजनीतिक दल विवाद में अपना फायदा देखता है।

विक्रम गोखले ने कहा, ‘मैं रणौत के बयान से सहमत हूं। हमें (ब्रिटिश राज में) आजादी दी गई थी। कई स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई और उस समय बड़े-बड़े लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास नहीं किया। वे सिर्फ मूकदर्शक बने रहे। इन मूकदर्शकों में बहुत से वरिष्ठ नेता थे। उन्होंने उन स्वतंत्रता सेनानियों को नहीं बचाया जो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ रहे थे।’त्रिपुरा में कथित सांप्रदायिक हिंसा और उसके विरोध में अमरावती तथा अन्य शहरों में हुए बवाल पर पूछे गए सवाल के जवाब में गोखले ने कहा कि सांप्रदायिक दंगे वोट बैंक की राजनीति का नतीजा हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हर राजनीतिक दल वह (वोट बैंक की राजनीति) करता है।’’ महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य पर गोखले ने कहा कि पूर्व सहयोगी दलों- शिवसेना और भाजपा को देश की भलाई के लिए फिर से साथ आना चाहिए।

गोखले ने दावा किया कि एमएसआरटीसी (महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम) और एयर इंडिया की वर्तमान स्थिति के लिए राजनेता जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, “मैं एसटी का ब्रांड एंबेसडर था। यह एक बड़ी इकाई है जो महाराष्ट्र में 18,000 से अधिक बसों का संचालन करती है।” एमएसआरटीसी  के हजारों कर्मचारी महाराष्ट्र सरकार के नकदी-संकट वाले उपक्रम के विलय की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं।

क्या बोली थीं कंगना रनौत: कंगना ने अपने बयान में कहा था, ‘सावरकर, रानी लक्ष्मीबाई, नेता सुभाषचंद्र बोस इन लोगों की बात करूं तो ये लोग जानते थे कि खून बहेगा लेकिन ये भी याद रहे कि हिंदुस्तानी-हिंदुस्तानी का खून न बहाए। उन्होंने आजादी की कीमत चुकाई, यकीनन। पर वो आजादी नहीं थी वो भीख थी। जो आजादी मिली है वो 2014 में मिली है।’

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