Saturday, December 4, 2021
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मुगलों ने कभी धर्म के नाम पर अत्याचार नहीं किया: कांग्रेस नेता मणिशंकर

नई दिल्ली। अपने विवादित बयानों के लिए सुर्खियों में रहने वाले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने इस बार मुगल शासन की जमकर तारीफ की है। नेहरू जयंती पर हुए एक कार्यक्रम के दौरान मणिशंकर अय्यर ने मुगल शासन में हुए अत्याचारों की बातों का खंडन किया। मणिशंकर अय्यर ने ये दावा किया कि मुगलों ने कभी देश में धर्म के नाम पर अत्याचार किया ही नहीं। उन्होंने मुगल बादशाह अकबर के शासन से लेकर तमाम दूसरे मुगल बादशाहों का उदाहरण देकर दावा किया कि मुगल शासन में कभी जोर जबरदस्ती धर्म परिवर्तन नहीं करवाया गया। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी जमकर हमला बोला।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों को सिर्फ देश के 80 फीसदी लोगों की चिंता है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे कुछ लोग केवल हिंदुत्व को मानते हैं। ये लोग सोचते हैं कि जो हिंदू धर्म को माने केवल वही भारतीय है और बाकी लोग गैर-भारतीय हैं, जिन्हें जब वो चाहें देश से निकाल सकते हैं। मणिशंकर अय्यर ने भाजपा पर घृणा फैलाने और देश में लोगों को बांटने का आरोप भी लगाया। अपने संबोधन में मणिशंकर अय्यर ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि मुसलमानों की जनसंख्या तेज़ी से बढ़ी है।

नहीं बढ़ी मुस्लिमों की जनसंख्या?
मुसलमानों की जनसंख्या को लेकर अपने बयान के समर्थन में तर्क पेश करते हुए उन्होंने बकायदा तथ्य भी पेश किया। मणिशंकर अय्यर ने पुरानी जनगणना का हवाला देते हुए कहा कि 1872 में देश में 72 फीसदी हिंदू थे और 24 फीसदी मुसलमान थे। कमोबेश ये संख्या अब भी वैसी ही है, इसलिए मुसलमानों पर जनसंख्या बढ़ाने के आरोप पूरी तरह से गलत हैं। अय्यर ने कहा कि 1872 में अंग्रेजों ने पहला सेंसस करवाया और उससे पता लगा कि 666 साल राज करने के बाद मुसलमानों की तादाद भारत में क़रीब 24 फीसदी और हिंदुओं की 72 फीसदी थी।

उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा, “ये कहते हैं कि मारपीट हुई, सब लड़कियों से बलात्कार हुआ और इन्होंने सबको मुसलमान बना लिया। अरे..मुसलमान बनते तो आंकड़े तो अलग होने चाहिए। 72 प्रतिशत मुसलमान होने चाहिए और 24 प्रतिशत हिंदू होने चाहिए, लेकिन असलियत क्या थी कि इतने ही थे और इसलिए पार्टीशन मांगने के पहले जिन्ना जी की बस एक ही मांग थी कि 30 फीसदी आरक्षण दीजिए सेंट्रल एसेंबली में….उन्होंने ये नहीं मांगा कि हमें 80 दो या 90 दो….उन्होंने 30 प्रतिशत मांगा..और ये इनकार किया गया क्योंकि उनकी तादाद मात्र 26 प्रतिशत की थी उस दिन।”

‘भारत को अपना देश मानते थे मुगल’
मुगलिया शासन की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए अय्यर ने कहा कि अंग्रेजों और मुगलों में बड़ा फर्क ये था कि मुगल इस देश को अपना मानते थे। मणिशंकर अय्यर ने बाबर की तारीफ कहते हुए कहा कि बाबर ने अपने बेटे हूमायूं को चिट्ठी लिखी थी जिसमें हिंदुस्तान के लोगों के धर्म में किसी तरह का दखल ना देने की बात कही थी। यही वजह है कि अकबर के शासन में धर्म के नाम पर कोई भेदभाव नहीं होता था।

उन्होंने कहा, “मुगलों ने इस देश को अपना बनाया। अंग्रेजों ने कहा कि हम तो यहां राज करने आए हैं। बाबर जो थे..जिसकी औलाद भारतीय जनता पार्टी के लोग मुझे नाम देते हैं…कि ये बाबर की औलाद है…इन लोगों को मैं बताना चाहता हूं कि वही बाबर भारतवर्ष आया सन 1526 में और उनकी मौत हुई 1530 में..मतलब वो भारत में मात्र 4 साल रहे…उन्होंने हूमायूं को बताया कि यदि आप इस देश को चलाना चाहते हो…यदि आप अपने साम्राज्य को सुरक्षित रखना चाहते हो तो आप यहां के निवासियों के धर्म में दखल ना दीजिएगा।”

सलमान खुर्शीद की किताब पर उठा है विवाद
दरअसल, अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सलमान खुर्शीद ने ‘सनराइज ओवर अयोध्या’ नाम से एक किताब लिखी है। इस किताब में उन्होंने हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस एवं बोको हरम जैसे आतंकवादी संगठनों से की है। इस तुलना के बाद वह भारतीय जनता पार्टी के निशाने पर आ गए। आतंकवादी संगठन से हिंदुत्व की तुलना किए जाने पर भगवा पार्टी खुर्शीद पर हमलावर है। इस तुलना से कांग्रेस के कई नेता भी खुश नहीं हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और अन्य विधायक भी खुर्शीद की इस सोच से असहमत दिखे।

राहुल ने भी हिंदुत्व पर दिया बयान
वहीं, गत शुक्रवार को पार्टी के डिजिटल अभियान ‘जग जागरन अभियान’ की लॉन्चिंग के समय राहुल गांधी ने कहा कि हिंदू धर्म और हिंदुत्व दो अलग-अलग चीजें हैं। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस पार्टी प्यार एवं राष्ट्रवाद की राजनीति करती है लेकिन इस विचारधारा पर आरएसएस एवं भाजपा की ‘नफरत वाली सोच’ हावी हो गई है। राहुल ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा जीवित और जीवंत है लेकिन भाजपा और आरएसएस की सोच उस पर हावी हो गई है। हिंदू धर्म मुस्लिम-सिख की पिटाई का नाम नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमने अपने लोगों को बीच अपनी विचारधारा को आक्रामकता के साथ आगे नहीं बढ़ा पाए हैं।’

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