Friday, December 3, 2021
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रूस से नहीं चुराया एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का फार्मूला, ब्रिटिश मीडिया के दावों का खंडन

मास्को। रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी को विकसित करने वाली टीम ने ब्रिटिश मीडिया की उन रिपोर्ट्स का खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि रूसी जासूसों ने कोरोना रोधी वैक्सीन स्पुतनिक वी तैयार करने के लिए एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का फार्मूला चुराया था।

स्पुतनिक वी टीम की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि अखबार द सन की रिपोर्ट उन लोगों की तरफ से बढ़ाई गई है जो कोरोना वायरस के खिलाफ दुनिया की सबसे प्रभावी और सुरक्षित वैक्सीन की सफलता का विरोध कर रहे हैं। टीम ने कहा कि इस तरह के हमले बहुत अनैतिक हैं, क्योंकि यह वैश्विक टीकाकरण के प्रयास को कमजोर करते हैं। रूसी वैक्सीन निर्माताओं की टीम ने कहा कि दोनों वैक्सीन में कोई समानता नहीं है क्योंकि स्पुतनिक वी और एस्ट्राजेनेका अलग-अलग प्लेटफार्म का उपयोग करते हैं।

अखबार ‘द सन’ की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन के मंत्रियों को खुफिया एजेंसियों ने यह जानकारी दी है। भारत में पुणे स्थित दवा कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट कोविशील्ड के नाम से एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन बनाती है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा सेवाओं ने कहा है कि उनके पास इस बात का सबूत है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के जासूसों में से एक ने दवा कंपनी के महत्वपूर्ण डाटा को चुराया, जिसमें कोरोना वैक्सीन का ब्लूप्रिंट (खाका) भी शामिल था।

अखबार ने सिक्योरिटी सर्विस का हवाला देते हुए कहा कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि रूसी जासूसों ने कोविड-19 वैक्सीन के ब्लूप्रिंट सहित ड्रग कंपनी के महत्वपूर्ण डाटा को चुरा लिया। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, इस डाटा के जरिए स्पुतनिक वी को तैयार किया गया। इसने यह भी बताया कि ब्लूप्रिंट और महत्वपूर्ण जानकारी एक विदेशी एजेंट द्वारा व्यक्तिगत रूप से चुराई गई थी।

दरअसल, रूस की स्पुतनिक वी वैक्सीन ऑक्सफोर्ड द्वारा डिजाइन की गई वैक्सीन के समान तकनीक का उपयोग करती है। यूनाइटेड किंगडम के सुरक्षा मंत्री डेमियन हिंड्स ने इस रिपोर्ट को वेरिफाई नहीं किया लेकिन उन्होंने कहा कि साइबर हमले अधिक कुशल होते जा रहे हैं।

डेमियन हिंड्स से एलबीसी रेडियो पर कहा, ‘मैं विशेष रूप से इस मामले पर टिप्पणी नहीं कर सकता हूं लेकिन ये मान लेना सही है कि कई मुल्क हैं, जो संवेदनशील जानकारियों को अपने पास रखना चाहते हैं। इसमें कमर्शियल सीक्रेट, साइंटिफिक सीक्रेट और बौद्धिक संपदा शामिल है। वे लगातार इसे चुराने में लगे हुए हैं। साइबर स्पेस में होने वाली चीजें काफी अलग तरीके से होती हैं। इसलिए हमें सतर्क रहने की जरूरत है।’

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