Sunday, November 28, 2021
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी विशेष: 800 करोड़ की लागत, एक हॉल ही इतना बड़ा जिसमें 10 हजार लोग कर सकेंगे एक साथ कीर्तन, ऐसा है दुनिया का सबसे बड़ा कृष्ण मंदिर

 

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से 130 किमी दूर नदिया जिले के मायापुर में दुनिया का सबसे बड़ा कृष्ण मंदिर बन रहा है। 6 लाख स्क्वायर फीट से भी ज्यादा क्षेत्र में तैयार हो रहे इस मंदिर में 7 फ्लोर हैं। पुजारी फ्लोर फरवरी-2020 में ही तैयार हो चुका है। साल 2023 में मंदिर का 80% काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद इसे भक्तों के लिए खोलने की योजना है। आज जन्माष्टमी के मौके पर हम मायापुर पहुंचे और जाना कि मंदिर कैसे तैयार हो रहा है।

कंस्ट्रक्शन वर्क के चलते मंदिर में अभी कोई नहीं जा सकता। हालांकि ग्राउंड फ्लोर पर इंटीरियर का काम पूरा हो चुका है। हम स्पेशल परमिशन लेकर वहां तक पहुंचे। हमारे साथ संस्था के रमेश महाराज भी थे। अंदर से देखने पर मंदिर किसी पैलेस की तरह नजर आता है। इंटीरियर तो पश्चिम के हिसाब से है, लेकिन इसमें फील वैदिक संस्कृति का है।

मंदिर का निर्माण इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ कृष्णा कॉन्सियशनेस यानी इस्कॉन (ISKON) करवा रहा है। मंदिर के चेयरमैन अल्फ्रेड फोर्ड हैं, जो यूएस की ऑटोमोबाइल कंपनी फोर्ड के संस्थापक हैं। इस्कॉन जॉइन करने के बाद उनका नाम अब अंबरीश दास है। मायापुर स्थित मंदिर संस्था का आध्यात्मिक मुख्यालय भी है। हमने मायापुर के को-डायरेक्टर और वैदिक प्लेनेटेरियम मंदिर के वाइस चेयरमैन बृजविलास दास जी से बातचीत की, उन्हीं की जुबानी जानिए मंदिर की पूरी कहानी।

सवालः मंदिर का ओवरऑल स्ट्रक्चर कैसा है? इसमें कुल कितने फ्लोर हैं?
जवाबः
 यह एक यूनीक टेम्पल है। इसमें कुल 7 फ्लोर हैं। यूटिलिटी फ्लोर, पुजारी फ्लोर, टेम्पल फ्लोर के बाद म्यूजियम फ्लोर्स हैं। खास बात यह है कि पुजारी फ्लोर 2.5 एकड़ में फैला हुआ है। यह दुनिया का सबसे बड़ा पुजारी फ्लोर है। यहां पुजारी भगवान की पूजा से जुड़ी तैयारियां करेंगे।

मंदिर के मुख्य गुंबद के नीचे खड़े होकर 7 मंजिला मंदिर का नजारा देखा जा सकता है।
मंदिर के मुख्य गुंबद के नीचे खड़े होकर 7 मंजिला मंदिर का नजारा देखा जा सकता है।

सवालः मंदिर कुल कितने स्क्वायर फीट में फैला है? कैंपस में मंदिर के अलावा और क्या है?
जवाबः
 मंदिर 6 लाख स्क्वायर फीट से भी ज्यादा एरिया में फैला हुआ है। मंदिर के फ्रंट में 45 एकड़ में गार्डन है, जबकि मंदिर 12 एकड़ में बना हुआ है। मंदिर का कीर्तन हॉल 1.5 एकड़ में बना हुआ है, जहां एक बार में 10 हजार भक्त एक साथ कीर्तन कर सकते हैं।

सवालः मंदिर की कुल ऊंचाई, लंबाई और चौड़ाई कितनी है?
जवाबः 
मंदिर की ऊंचाई 350 फीट है। गुंबद का व्यास 177 मीटर है। 6 लाख स्क्वायर फीट में फैला हुआ है। यह दुनिया का सबसे बड़ा वैदिक मंदिर है।

सवालः मंदिर को बनाने में किस मार्बल का इस्तेमाल किया जा रहा है, इसे किन देशों से बुलवाया गया है?
जवाबः 
राजस्थान के मकराना और वियतनाम से व्हाइट मार्बल, फ्रांस से रेड मार्बल, इटली से ब्लू मार्बल बुलवाया है। स्पेन से भी मार्बल आया है। जिस देश का जो मार्बल बेस्ट है, जहां का कलर बेस्ट है, वहां से वो मार्बल इम्पोर्ट किया गया है, ताकि दुनिया का सबसे खूबसूरत मंदिर बने।

मंदिर में अन्न-प्रसाद के लिए भी व्यवस्था है। सैकड़ों लोग एक साथ बैठकर खाना खा सकते हैं।
मंदिर में अन्न-प्रसाद के लिए भी व्यवस्था है। सैकड़ों लोग एक साथ बैठकर खाना खा सकते हैं।

सवालः मंदिर का कुल बजट कितना है, अभी तक कितना खर्च हो चुका है?
जवाबः
 मंदिर का बजट 800 करोड़ से भी ज्यादा का है। अभी तक 444 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो चुके हैं।

सवालः इसे दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर क्यों कहा जा रहा है?
जवाबः
 इसकी दो वजह हैं। पहली तो यह कि इसका गुंबद जितना बड़ा है, उतना अन्य किसी मंदिर का नहीं है। गुंबद के अंदरूनी भाग में कॉस्मोलॉजिकल मॉडल तैयार किया जा रहा है। यानी यहां दुनिया क्यों बनी, कैसे बनी, किसने बनाई, यह सब भी भक्तों को पता चलेगा। इसे साइज के चलते भी दुनिया का सबसे बड़ा वैदिक मंदिर बताया जा रहा है, क्योंकि यह 6 लाख स्क्वायर फीट से भी ज्यादा एरिया में फैला हुआ है। मंदिर में प्लेनेटेरियम (ताराघर) तैयार किया गया है।

सवालः इसे वैदिक तारामंडल (प्लेनेटेरियम) कहा जा रहा है, इसका क्या मतलब है?
जवाबः
 इसके पीछे भगवत गीता की फिलॉसफी है। मंदिर के फोकस में अध्यात्म और विज्ञान दोनों हैं। मंदिर के गुंबद में कॉस्मोलॉजिकल मॉडल नजर आएगा, जो दुनिया की रचना के बारे में बताएगा। यह ऐसा पहला मंदिर भी है, जहां मंदिर और प्लेनेटेरियम एक साथ ही हैं। प्लेनेटेरियम का एक पूरा सेक्शन यहां तैयार किया गया है।

मंदिर में हर समय कुछ विदेशी भक्तों को हरे कृष्णा नाम का संकीर्तन करते हुए देखा जा सकता है।
मंदिर में हर समय कुछ विदेशी भक्तों को हरे कृष्णा नाम का संकीर्तन करते हुए देखा जा सकता है।

सवालः मायापुर में ही इस मंदिर को क्यों बनाया गया?
जवाबः
 राधा और कृष्ण के अवतार कहे जाने वाले चैतन्य महाप्रभु का जन्म मायापुर में ही हुआ था। यह इस्कॉन का आध्यात्मिक मुख्यालय भी है। संस्था यहां से अपने विचारों को देश-दुनिया के हर एक कोने तक पहुंचाना चाहती है, इसके लिए मायापुर को ही चुना गया। इसे स्वामी श्रील् प्रभुपाद के विजन के हिसाब से तैयार किया गया है।

सवालः इस मंदिर की सबसे बड़ी खूबी क्या है, जो इसे दुनिया के दूसरे सभी मंदिरों से अलग बनाती है?
जवाबः
 यह सिर्फ एक मंदिर नहीं है, बल्कि टीचिंग टेम्पल है। यहां भगवत गीता की फिलॉसफी समझी जा सकेगी। दुनिया क्यों बनी, कैसे बनी, किसने बनाई, इस बात को वैज्ञानिक तथ्यों के साथ जाना जा सकेगा। वैदिक स्क्रिप्चर्स की फिलॉसफी समझने के लिए यह एक बेहतरीन स्थान होने वाला है।

सवालः इतना भव्य मंदिर बनाने का मकसद क्या है? इसे ईस्ट और वेस्ट का मिक्सचर बताया जा रहा है, कैसे?
जवाबः
 भारत के पास आध्यात्मिक शक्ति है। पश्चिम के पास ताकत है हमारे कल्चर के लिए एक खूबसूरत जगह तैयार करने की। इसी कारण इसे ईस्ट और वेस्ट का मिक्सचर कह रहे हैं। इसे बनाने में दुनियाभर के भक्त सहयोग कर रहे हैं। वैदिक संस्कृति को वैज्ञानिक तथ्यों के साथ देश-दुनिया तक पहुंचाना, हमारा लक्ष्य है।

सवालः मंदिर बनने के बाद कितने भक्तों के आने का अनुमान है?
जवाबः
 अभी हर साल 60 लाख भक्त मायापुर आते हैं। मंदिर बनने के बाद यह संख्या 6 करोड़ से भी ज्यादा होने का अनुमान है। एक दिन में 5 से 25 हजार तक भक्त आते हैं। खास मौकों पर भक्तों की संख्या लाखों में होती है।

साभार-दैनिक भास्कर

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