Sunday, November 28, 2021
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गड़बड़ झाला – जीडीए 112 चौराहों पर लागू कर रहा ITMS प्रणाली, पर इनमें से 30 चौराहे हैं अस्तित्व विहीन

गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण ने गाज़ियाबाद महानगर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के अंतर्गत 112 चौराहों पर कैमरे के साथ आधुनिक उपकरण लगाने के नाम पर 70 करोड़ का टेंडर छोड़ा है। लेकिन जीडीए शायद यह भूल गया जिन 112 चौराहों के लिए यह कवायद शुरू की है उसमें 31 चौराहों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। जबकि 53 चौराहों पर यातायात व्यवस्था का संचालन पहले ही नगर निगम कर रहा है। ऐसे में बचे 28 चौराहे के लिए 15 से 20 करोड़ रुपये खर्च होने चाहिए।

भाजपा के वरिष्ठ पार्षद राजेंद्र त्यागी ने इस मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसके जांच की मांग की है। यही नहीं उनका कहना है कि जिस कंपनी को यह टेंडर दिया जा रहा है वह चाईनीज कंपनी है। इससे देश की आंतरिक सुरक्षा को भी खतरा पैदा हो सकता है। एक पत्रकार वार्ता में राजेंद्र त्यागी ने बताया कि जीडीए द्वारा आईटीएमएस योजना के तहत 112 चौराहों के लिए 69.95 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया। इनमें जीडीए के आला अधिकारियों से यह जानने की जहमत नहीं उठाई कि शहर में वास्तविक चौराहों की संख्या कितनी है। उन्होंने बताया कि एनएच 24 के चौड़ीकरण और मेरठ रोड पर रैपिड रेल के निर्माण के कारण 31 चौराहों का अस्तित्व ही नहीं बचा है।

वहीं 112 में 53 चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था का संचालन नगर निगम 2016 से करा रहा है। नगर निगम ने 53 चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था के संचालन के लिए पीपीपी मॉडल पर चौराहों को ठेका दिया था। इनमें संबंधित कंपनी को क्योस्क और विज्ञापन के जरिए आपनी आमदनी करने के लिए अनुबंध किया गया है। इसमें तीन सालों से इन चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल के साथ ट्रैफिक व्यवस्था का संचालन हो रहा है। ऐसे में सिर्फ 28 चौराहों के लिए 70 करोड़ खर्च करने का कोई मतलब नहीं है।

उन्होंने बताया कि यही नहीं जीडीए ने जिस कंपनी को आईटीएमएस योजना के तहत कैमरे लगाने का टेंडर दिया है वह चाईनीज बेस्ड कंपनी है। ऐसे कैमरों के रखरखाव पर काफी खर्च होगा। यही नहीं ऐसे कैमरे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते है। रक्षा मंत्रालय ने खुद ही चाईनीज कंपनियों को सुरक्षा उपकरणों को लगाने के लिए प्रतिबंधित कर रखा है। इसलिए इस प्रकरण में जीडीए को केवल 28 चौराहें के रखरखाव के लिए उपकरण लगाने है। इसके लिए 15 से 20 करोड़ रुपये काफी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी पैसे दुरुपयोग गलत है। अगर 53 चौराहों का सफलता पूर्वक संचालन नगर निगम करा रहा है तो बाकी चौराहों का संचालन भी वह बिना किसी खर्च के कर सकता है। भाजपा पार्षद ने इस मामले में मुख्यमंत्री आदित्यननाथ से जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस मौके पर राजेंद्र त्यागी के अलावा जीडीए बोर्ड मेंबर हिमांशु मित्तल, केके त्यागी, भूपेंद्र चितौड़िया, आरके सिंह, आशाराम त्यागी आदि उपस्थित थे।

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