ताज़ा खबर :
prev next

अपनी रक्षा के लिए प्राण त्याग देने वाली इन वीरांगनाओं का साहस हर भारतीय के लिए सबक है

अपनी रक्षा के लिए प्राण त्याग देने वाली इन वीरांगनाओं का साहस हर भारतीय के लिए सबक है

नई दिल्ली। लव जिहाद के जाल में फंसकर अपने धर्म और सम्मान को खो देने वाली हर महिला को भारत की उन दो नारियों की बलिदान के बारे में जान लेना चाहिए जिन्होंने अपने मान और धर्म की रक्षा करते हुए प्राण त्याग दिये थे।

बेला और कल्याणी यह दो नाम इतिहास के पन्नों में विलुप्त हो चुकी हैं। जिन्होंने राष्ट्र भक्ती कि अद्भुत मिसाल दिया था। बेला धर्म रक्षक पृथ्विराज चौहान की बेटी थी और कल्याणी जयचंद की पौत्री थी। बेला और कल्याणी में गहरी मित्रता थी। जब मुहम्मद घोरी भारत को लूट कर स्वदेश चला गया तब वह अपने साथ लाखों भारतीयों को गुलाम बनाकर ले गया था। उसमें दो रजपूत नारियां बेला और कल्याणी भी थी। जब घोरी अफघन पहुंचा तब वहां उसका स्वागत उसके काज़ी निजामुल्क ने किया। काज़ी निजामुल्क घोरी से बहुत प्रसन्न था कि वह भारत जैसे सोने कि चिड़िया को लूट कर धन दौलत ले आया था।

बड़े प्रसन्न होकर काज़ी घोरी से पूछता है कि वह भारत से काज़ी के लिए क्या तोहफ़ा लाया है। तब घोरी ने बेला और कल्याणी को आगे किया और कहा कि वह इन दोनों को काज़ी को समर्पित करना चाहता है। काज़ी इसलिए भी प्रसन्न था कि घोरी ने भारत में जिहाद कर इस्लाम को भी फैलाया था। दोनों लडकियों को देख वह उनसे विवाह का प्रस्ताव रखता है। बेला और कल्याणी ने बडी ही चतुराई से विवाह के लिये दो शर्तें रखती हैं। जिसके लिए काज़ी तुरंत राज़ी हो जाता है। बेला और कल्याणी ने पहली शर्त यह रखी कि जब तक विवाह नहीं हो जाती तब तक काज़ी उन्हें छूकर अपवित्र नहीं करेगा। दूसरा शर्त था कि शादी में दूल्हे का कपडा मातृभूमी भारत से ही आयेगा। दोनों शर्तों के लिए काज़ी राज़ी हो गया।

बेला और कल्याणी ने भारत में कवि चंद के नाम खत लिख कर एक विषैला पोशाक, जिसे पहनते ही काज़ी का बदन जल उठे ऐसे वस्त्र बनाकर भेजने के लिए अनुरोध किया। कवि चंद ने ठीक वैसा ही पोषक बनाकर अफघन भेज दिया। विवाह के दिन काज़ी को वह पोशाक पहना दिया गया। काज़ी को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि वह मौत का पोशाक पहन रहा है।

विवाह के वक़्त दोनों क्षत्राणियों ने इच्छा जताई कि वे महल के छत पर जाकर जनता को देखना चाहती हैं। काज़ी भी उनके साथ छत की ओर गया उतने में ही उसके विषैले पोशाक ने अपना काम करना शुरू कर दिया था। उसके बदन में जलन शुरू होने लगी और वह पागल कुत्ते की तरह इधर उधर भागने लगा। लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हो क्या रहा है। इसके बाद बेला और कल्याणी ने काज़ी को देख कहा, तुमने ही घोरी को भारत पर आक्रमण करने के लिए उकसाया था, हमने तुझे मारने का षड्यंत्र रचकर अपने देश को लूटने का बदला ले लिया है। उन्होंने कहा, किसमें इतना साहस है जो जीते जी हमारे शरीर को हाथ भी लगा दे। तुम बड़े मजहबी बनते हो अपने धर्म को शांतिप्रिय धर्म बताते हो। जिहाद का ढोल पीटने के नाम पर लोगों को लूटते हो और शांति से रहने वाले लोगों पर जुल्म ढाहते हो,  धिक्कार है तुम जैसे युवक पर।

काज़ी के पापों को गिनवाकर दोनों वीरांगनाओं ने एक दुसरे के सीने में खंजर भोंक छत से कूदकर प्राण त्याग दिये। विष के प्रभाव से काज़ी भी तड़प तड़प कर मर गया। अपने धर्म और अपने मातृभूमी की अपमान का बदला बेला और कल्याणी ने काज़ी को मार कर लिया। अपने सम्मान के लिए उन्होंने मृत्यु को गले लगाया लेकिन अपने मान और धर्म की रक्षा की।

यह है असली जीवन की महानायिकांएं जिन्होंने धर्म और देश के लिए अपने प्राणों की बलिदान दी। इन्हें अपना आदर्श बनायें आज की युवा पीढ़ी। जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म सदैव उसकी रक्षा करता है। यह पुण्य भूमी हमारे पूर्वजों के बलिदान से ओत प्रॊत है। अपने सम्मान और धर्म की रक्षा करते हुए अनेकों महिलाओं ने प्राण त्याग दिये हैं। ऐसी महिलाएं हमारे लिए न केवल आदर्श है अपितु सदैव पूजनीय है।

आज महिलाओं को मुसीबत के घड़ी में धैर्य और साहस से किसी भी कार्य को करना चाहिए, जल्दबाजी में उठाया गया कदम आपके लिए खतरनाक भी हो सकता है।

हमारा गाज़ियाबाद के एंड्राइड ऐप के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैंआप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो भी कर सकते हैं।