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पुराने गेटों के जीर्णोद्धार के नाम पर 6 करोड़ खर्च करने की ज़िम्मेदारी मिली जीडीए को

पुराने गेटों के जीर्णोद्धार के नाम पर 6 करोड़ खर्च करने की ज़िम्मेदारी मिली जीडीए को

गाज़ियाबाद | गाज़ियाबाद शहर अब अपने मूल आकार से कई गुना बढ़ चुका है, मगर शहर के पुराने बाशिंदों को याद होगा कि कभी यह शहर केवल चार गेटों के भीतर ही सिमटा हुआ था। इन चार गेटों में से एक सिहानी गेट तो कब का टूट चुका है मगर गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) अब प्राचीन दिल्ली गेट, डासना गेट व जवाहर गेट को जीडीए हैरिटेज के रूप में विकसित करेगा। इस परियोजना पर जीडीए छह करोड़ रुपये खर्च करेगा।

एलिवेटेड रोड का उद्घाटन करने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना का भी शिलान्यास किया था। बता दें कि पहले इन गेटों के जीर्णोद्धार के नाम पर प्रोजेक्ट शुरू कर पैसे लूटने का काम नगर निगम करा रहा था। इसके लिए नगर निगम ने तीनों गेटों के जीर्णोद्धार के लिए टेंडर जारी कर ठेकेदार ने काम भी शुरू कर दिया लेकिन कुछ लोगों ने आपत्ति की तो काम बंद हो गया। उसके बाद मंत्री अतुल गर्ग के हस्तेक्षप के बाद इन तीनों गेटों के हैरिजेट के रूप में विकसित करने की जिम्मेदारी जीडीए ने ली। तब तक निगम के कई ठेकेदार और कुछ अधिकारी इस प्रोजेक्ट के लिए डीपीआर बनाने, टेंडर जारी कर काम देने के नाम पर लाखों रुपये इधर से उधर कर चुके थे। पहले किस ठेकेदार को काम मिला था, किन लोगों ने आपत्ति दाखिल की थी और अब नया ठेकेदार कौन है, इसकी तह में जाना बेकार है। सभी जानते हैं कि प्रदेश में सत्ता बदल चुकी है और नई सरकार का मूल मंत्र है “सबका साथ-सबका विकास”।

जीडीए के अधिकारियों को जब जीर्णोद्धार की ज़िम्मेदारी मिली तो उन्होंने नगर निगम द्वारा बनाई गई डीपीआर को कूड़े में फेंक कर नए सिरे से काम शुरू कर दिया। बता दें कि सिर्फ डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट और टेंडर डॉक्युमेंट्स बनाने का ठेका ही कई लाख में छूटता है और इस काम के लिए टेंडर जारी करने की जरूरत भी नहीं होती है। जीडीए के पैनल पर कुछ कंसल्टेंट होते हैं, उन्हीं में से तीन से कुटेशन मांगकर काम किसी एक को काम दे दिया जाता है। अगर अखबार में विज्ञापन छपता भी है तो ऐसे पेज पर जहां किसी की नज़र न पड़े।

इस विज्ञापन के खेल में भी जीडीए के एक कर्मचारी को विशेष दक्षता हासिल है। जीडीए के विज्ञापन कब और किस अखबार में छापेंगे, इसका निर्णय यही अफसरों का कृपापात्र जूनियर स्तर का कर्मचारी करता है। यही कारण है कि कम्यूटर विभाग में काम करने वाले इस कर्मचारी के दफ्तर में सुबह से लेकर शाम तक पत्रकारों और पत्रकार नुमा दलालों का डेरा जमा रहता है।

बहरहाल, जीडीए ने तीनों गेट को लाल जयपुरी पत्थर लगाने की रूपरेखा तैयार की है। जेडीए तीनों गेट पर जीडीए छह करोड़ रुपये खर्च करेगा। लाल पत्थर लगाने के साथ ही इसमें फैंसी लाइट भी लगाई जाएंगी। इस मामले में नगर निगम की ओर से जीडीओ को एनओसी जारी कर दी गई है। जिसके तहत नगर निगम को इन तीनों गेटों का जीर्णोद्धार करने में किसी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं है। निगम की ओर से जारी किए गए टेंडरों को रदद कर दिया गया। नगर निगम की ओर से जारी किए गए टेंडर के बाद ठेकेदार के नुकसान की भरपाई नगर निगम अब जनता से टैक्स के रूप में एकत्र पैसों से करेगा। नगरायुक्त सीपी सिंह के मुताबिक जीडीए के पास नगर निगम से ज्यादा फंड है। वह इन गेटों का बेहतर तरीके से विकसित कर रहता है।

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By हमारा गाज़ियाबाद ब्यूरो : Monday 16 जुलाई, 2018 00:05 AM