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दलितों के प्रदर्शन में फंसी रही एम्बुलेंस, बेटे ने कहा- मैं अपने पिता को मरते हुए देख रहा था

दलितों के प्रदर्शन में फंसी रही एम्बुलेंस, बेटे ने कहा- मैं अपने पिता को मरते हुए देख रहा था

नई दिल्ली। सोमवार को दलित संगठनों द्वारा प्रदर्शन के दौरान किये गये उपद्रव में तमाम पुलिस चौकियां फूंकी गई, गाड़ियां जलाई गईं। वहीं एक 68 वर्षीय बीमार बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। बीमार बुजुर्ग का बेटा उन्हें कंधे पर लादकर अस्पताल भागा हुआ जा रहा था लेकिन बीच सड़क पर प्रदर्शनकारियों के हंगामे की वजह से उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल सका जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई।

बिजनौर के बारुकी गांव निवासी 68 वर्षीय लोक्का सिंह बेहताशा पेट दर्द से पीड़ित थे और सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। अपने पिता को दर्द से कराहते देख बेटे रघुवर सिंह ने अपने बीमार पिता को ऐंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाना चाहा, लेकिन बीच सड़क में प्रदर्शनकारियों के जाम में फंस गए। इसके बाद पिता को कंधे पर लादकर जब रघुवर अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने पिता को मृत घोषित कर दिया।

जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने अपने बीमार पिता लोक्का सिंह को प्राइवेट अस्पताल या मेरठ के किसी बड़े अस्पताल ले जाने को कहा था, लेकिन समय और पैसों की कमी के चलते रघुवर ने पिता को प्राइवेट अस्पताल ले जाना उचित समझा। रघुवर ने बताया कि सोमवार को सुबह करीब पौने बारह बजे डॉक्टरों ने हमें मेरठ मेडिकल कॉलेज या किसी प्राइवेट अस्पताल ले जाने को कहा। रघुवर के पास पिता को मेरठ ले जाने के लिए समय और पैसा नहीं था इसलिए उन्हें एंबुलेंस से प्राइवेट अस्पताल लेकर गए।

अस्पताल ले जाने के लिए शास्त्री चौक की ओर रवाना हुए जो जिला अस्पताल से एक किमी दूर है, लेकिन जुडगी क्रॉसिंग में उनकी ऐम्बुलेंस फंस गई। वहां सौ से ज्यादा प्रदर्शनकारी नारेबाजी कर रहे थे। चारों ओर शोर शराबा था। रघुवर ने कहा, ‘मैंने उनसे विनती की कि मुझे जाने दें। मैंने एक हद तक जोर लगाकर उनसे पुकार लगाई, लेकिन किसी ने मेरी चीख नहीं सुनी। कोई वहां से नहीं हिला। रखुवर ने कहा कि मैं ऐंबुलेंस के अंदर अपने पिता को मरते हुए देख रहा था, मुझे नहीं पता था कि क्या करना है।

मैं किसी भी हालत में उन्हें बचाना चाहता था, इसलिए मैंने उन्हें कंधे में उठाया और दौड़ना शुरू किया।’ रघुवर ने ऐंबुलेंस से आधा किमी का रास्ता तय कर लिया था और अब उन्हें अस्पताल पहुंचने के लिए 600 मीटर का रास्ता और तय करना था। उन्होंने एक घंटे तक पिता को कंधे में उठाए दौड़ते हुए यह दूरी तय की। लाख कोशिशों के बाद भी रघुवर अपने पिता को नहीं बचा सका और अस्पताल में डॉक्टरों ने लोक्का सिंह को मृत घोषित कर दिया। पत्नी विमला देवी ने कहा, ‘अगर प्रदर्शनकारी ऐंबुलेंस को जाने देते तो आज मेरे पति जिंदा होते। इस प्रदर्शन ने हमारे पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया।’

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By हमारा गाज़ियाबाद संवाददाता : Sunday 22 जुलाई, 2018 16:39 PM