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जेल की कोठरी छोड़ कर एम्स पहुँचने में कामयाब हुए लालू, अब शानदार कमरे से संचालित करेंगे देश की राजनीति

जेल की कोठरी छोड़ कर एम्स पहुँचने में कामयाब हुए लालू, अब शानदार कमरे से संचालित करेंगे देश की राजनीति

नई दिल्ली | जाति, उपजाति और धर्म के आधार पर सैंकड़ों जन समूहों में भारत के मतदाताओं की खासियत है कि वोट देते समय वे नेता के चरित्र को नहीं बल्कि उसकी जाति को देखते हैं। यही कारण है कि एक योग्य और ईमानदार उम्मीदवार की जमानत जब्त हो जाती है, जबकि खून, दंगे फैलाने और अरबों रुपये का घोटाला करने के बाद भी कुछ नेता अपनी जाति के बल पर जेल से ही जीत जाने में कामयाब हो जाते हैं। हमारे अखबार और मीडिया भी भले ही अनेकता में एकता का ढिंढोरा पीटती रहे मगर चुनाव आते ही नेताओं को उनकी जाति और जातियों को संख्या बल में तौलने लगती है। यही कारण है कि प्रशासन और न्यायपालिका में बैठे निर्णय लेने में सक्षम और अपने निर्णय से रुख बदलने में माहिर अधिकारियों को इस बात का डर सताता रहता है कि पता नहीं जेल में पड़ा कौन सा माननीय से आम जनता बना जेल में बंद कैदी कब फिर से माननीय हो जाए और वे सत्ता के रुख के हिसाब से ऐसे कैदियों की सुख-सुविधाओं को कम या ज्यादा करते रहते हैं।

दिल्ली में इन दिनों अपनी कुर्सी बचाने के लिए विपक्षी एकता को मजबूत करने और जनता को लुभाने के लिए नए नारों और जुमलों को गढ़ने के लिए सभी दल एक हो रहे हैं। ऐसे में बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में रांची में जेल की सजा काट रहे राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव भला दिल्ली से दूर कैसे रहते। शायद यही कारण है कि रांची जेल में बंद लालू यादव को अब “विशेष इलाज” के लिए गुरुवार को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया। कैदी लालू के स्वागत के लिए केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने एम्स जाकर लालू से मुलाकात की और उनकी तबीयत के बारे में मालुमात हासिल की। मंत्री ने ट्वीट बकायदा कर यह जानकारी दी, जिससे उनके बिहारी वोट बैंक को पता चल गया कि वे दुख की इस घड़ी में लालू यादव के साथ हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) ने लालू को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के लिए रेफर किया था। एम्स के एक चिकित्सक ने बताया, ‘उनकी हालत स्थिर है, उन्हें दोपहर में यहां लाया गया। उनके रक्त में शुगर की मात्रा थोड़ी बढ़ी हुई है और उनके गुर्दे में संक्रमण है।’ लालू यादव को मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया है। लालू को बेचैनी की शिकायत के बाद 17 मार्च को रिम्स में भर्ती कराया गया था।

4 मार्च को चारा घोटाला से जुड़े छह मामलों में से दुमका कोषागार के चौथे मामले में लालू यादव को 14 साल की जेल और 60 लाख रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई गई। घोटाले से जुड़े अब तक के चारों मामलों में आरजेडी प्रमुख को मिली ये अब तक की सबसे बड़ी सजा है। इससे पहले 24 जनवरी को कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई थी। लालू फिलहाल बिरसा मुंडा जेल में अपनी सजा काट रहे हैं। यह किस्सा इस बात को साबित करने के लिए काफी है कि भारतीय न्यायपालिका और दंड प्रणाली में दोषी के जुर्म को नहीं बल्कि उसकी राजनैतिक हैसियत को देखकर सजा दी जाती है। वरना ऐसे की जुर्म में बंद किसी दूसरे कैदी को तो अब तक जेल की बैरक और बिस्तर तक नसीब हुआ होता और जेल के अघोषित कानून के अंतर्गत उसकी ड्यूटी अभी जेल के टॉइलेट साफ करने में लगी होती।

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