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महिला सुरक्षा के लिए कुछ हम भी करें

अभी 8 मार्च को महिला दिवस मनाया गया। हर बार की तरह इस बार भी महिलाओं की स्थिति सुधारने, छेड़छाड़ रोकने और उनका सम्मान करने के बारे में बहुत सारे लेख लिखे गए, टीवी पर चर्चाएँ हुईं और सोशल मीडिया पर खूब सारा ज्ञान एक दूसरे के साथ बांटा गया। आशा करता हूँ कि ये सारे लेख और चर्चाएँ निश्चित रूप से अपना काम करेंगी और बहुत सारे पुरुषों को सीख और प्रेरणा मिलेगी। इस विषय पर मैंने भी ”हमारा गाज़ियाबाद” टीम की महिला सदस्यों और बहुत सारी अन्य महिलाओं से चर्चा की। इस बातचीत और अपनी सोच के आधार पर कुछ चीज़ें आप से शेयर करना चाहता हूँ।
हम सब जानते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं के प्रति पुरुषों का अलग-अलग रवैया है। मुंबई, गोवा, कोलकाता, बेंगलुरु और चेन्नई महानगरों में रहने वाली महिलाएं रात के बारह बजे भी सड़क और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं। जबकि दिल्ली और एनसीआर में ऐसा नहीं है। महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मामले में अपने गाज़ियाबाद के आसपास का माहौल कुछ ज्यादा ही खराब है। यहाँ घर की गली से लेकर सड़क तक हर जगह पुरुषों की गन्दी नज़र और जुबान से परेशान महिलाओं का दिखना आम बात है। थ्री व्हीलर्स और लोकल बसों में तो हालत और भी ख़राब है।

यहाँ सोचने वाली बात ये है कि

  • छेड़छाड़ और फब्तियां कसने वाले पढ़े-लिखे भी होते हैं और अनपढ़ भी यानि केवल पढ़ाई-लिखाई से इस समस्या को दूर नहीं किया जा सकता।
  • धर्म भी अपने मानने वालों को संस्कारित करने में असफल रहे हैं क्योंकि हर धर्म के लड़के और पुरुष छेड़छाड़ करने वालों में शुमार होते हैं।
  • बेरोज़गार और काम में लगे लोग सामान रूप से इस अपराध में लिप्त पाए गए हैं इस लिए रोज़गार देने से भी इस सोच को नहीं बदला जा सकता।
  • शहरी और ग्रामीण परिवेश भी इस समस्या के समाधान में कोई भूमिका नहीं निभाते।
    अभी पुलिसिंग के बेहतर होने की भी कोई संभावना नहीं दिखती।

इसी तरह से अन्य बहुत सारे कारणों की समीक्षा करके देखने पर स्पष्ट हुआ कि महिलाओं का सम्मान करना सिखाने और छेड़छाड़ रोकने के लिए कुछ अलग हट कर काम करना होगा। जैसे कि

  • घर में लड़कों को पालते हुए उनसे उनकी बहनों के सामान ही काम कराये जाएँ। बर्तन मांजने से लेकर बटन टांकने तक के काम बेटे बेटियों से सामान रूप से करा कर लड़कों को ये सिखाया जा सकता है कि आप स्पेशल नहीं हो और आपकी बहन आप से किसी भी प्रकार से कम नहीं है।
  • लड़कों से “क्या लड़कियों की तरह रो रहा है” जैसे डायलाग भी ना बोले जाएँ, जिनसे “लडकियां कमजोर होती हैं” जैसे गलत तथ्य लड़कों के दिमाग में ना बैठें।
  • इसी प्रकार बेटियों को शर्म हया सिखाने के फेर में दब्बू और संकोची नहीं बनाया जाए। बल्कि उन्हें पता हो कि गलत को सहना नहीं है। बल्कि गलत के खिलाफ बोलना है और ज़रूरत पढ़े तो जोर से चिल्लाना भी है।
  • बेटियों की पढ़ाई लिखाई से कोई समझौता नहीं हो बल्कि उन्हें स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया जाए।
  • बेटियों को बेटों के समान ही सेल्फ डिफेन्स की ट्रेनिंग दिलाना भी आज बहुत आवश्यक हो गया है। साथ ही एनसीसी और स्काउट गाइड आदि में भी बेटे बेटियों को सामान रूप से प्रतिभाग कराया जाए।
  • महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए मोबाइल एप्स का इस्तेमाल करने से भी महिलाओं की सुरक्षा बढ़ सकती है।
  • पुलिस और प्रशासन में यदि महिला अधिकारियों की संख्या बढ़ जाए तो महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में काफी कमी आ सकती है।
  • समाज का सक्षम वर्ग कमजोर वर्ग की बच्चियों को गोद लेकर उन्हें उच्च शिक्षा दिला उनकी स्थिति बेहतर बनाने में अपना योगदान दे सकता है।
  • छेड़छाड़ की शिकार हमारी बहनें और बेटियाँ अपने अनुभव भाइयों, पुरुष सहकर्मियों और मित्रों को बताएँगी तो पुरुषों को भी पता चलेगा कि छेड़छाड़ की शिकार महिलाओं पर क्या गुजरती है।
  • अपने सामने होती छेड़छाड़ पर यदि आस पास खड़ी सभी महिलाएं आवाज बुलंद करने लगें तो छेड़छाड़ पर काफी अंकुश लगाया जा सकता है।
  • किसी महिला के साथ होती छेड़छाड़ का अपने मोबाइल से विडिओ बनाकर उसे सोशल मीडिया और पुलिस के साथ शेयर भी छेड़छाड़ के विरुद्ध एक कारगर इलाज़ हो सकता है।

अंत में एक बात बड़ी विनम्रता के साथ कहना चाहता हूँ कि मानव सभ्यता आज जिस मुकाम पर पहुंची है उसमें पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का योगदान कहीं अधिक है। महिलाओं को ये बात अच्छे से समझ लेनी चाहिए की आप पुरुषों के बराबर नहीं बल्कि उनसे बेहतर हो। घर के काम से लेकर एरोप्लेन उड़ाने तक और कला से ले कर विज्ञान तक हर क्षेत्र में हमारी महिलाओं ने अपना लोहा मनवाया है इसलिए अपने आस पास के पुरुषों जैसे पिता, भाई, बेटा, स्टूडेंट और सहकर्मी को अच्छा पुरुष बनाने में आप भी आप अपनी भूमिका को समझो और निभाओ।

“सभी पुरुष महिलाओं का सम्मान करने लगें तो हमारी धरती स्वर्ग जैसी सुन्दर हो जायेगी” ये बात पुरुषों को ज़ल्द समझ आ जायेगी इसी आशा के साथ ,

आपका
अनिल कुमार

By अनिल कुमार (पब्लिशर व एडिटर-इन-चीफ) : Monday 18 जून, 2018 20:49 PM