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बुनियादी ज़रुरतों के लिए तरसता अमृत स्टील कम्पाउंड

बुनियादी ज़रुरतों के लिए तरसता अमृत स्टील कम्पाउंड

 

 

 

 

 

 

 

गाज़ियाबाद। एक ओर जहां प्रदेश सरकार देश दुनिया के उद्यमियों को उत्तर प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए हर संभव तरीके से आकर्षित कर रही है वहीँ प्रदेश में पहले से स्थापित उद्योग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में सिसक रहे हैं।

साउथ साइड ऑफ जीटी रोड स्थित अमृत स्टील कमपाउंड इसी प्रकार का एक क्षेत्र है जहां प्रशासन ने डेढ़ सौ से अधिक लघु उद्योग मालिकों को याचक बना छोड़ा है। पानी और सड़क जैसी बेसिक सुविधाओं के लिए ये उद्यमी हर माह उद्योग बंधू बैठक में प्रशासन के आगे गुहार लगाते हैं पर प्रशासन केवल आश्वासन देने के और कुछ नहीं करता।

यहाँ के नाले और कूड़े के बड़े बड़े ढेर स्वच्छता अभियान को मुहं चिढ़ा रहे हैं। उद्योग बंधू के अलावा आरटीआई, जनसुनवाई एप,और यूपीएसआईडीसी से शिकायत जैसे सभी पैंतरे भी उद्यमी अजमा चुके हैं पर सभी का परिणाम शून्य ही रहा है। मंडलायुक्त से भी कई बार शिकायत की गई लेकिन आश्वासन के सिवाय इन्हें कुछ नही मिला।

बता दें कि अमृत स्टील कम्पाउंड औद्योगिक क्षेत्र की नीवं करीब 10 साल पहले रखी गई थी। इस पूरे क्षेत्र में 250 मीटर के करीब 300 प्लाट हैं जिसमें वर्तमान में करीब 150 से अधिक फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। इन फैक्ट्रियों से अच्छा-खासा टर्नओवर होता है जिस से सरकार को काफी राजस्व और सैंकड़ों लोगों को रोज़गार भी प्राप्त होता है। जब इस कम्पाउंड की नीवं रखी गई थी तब यहाँ बिजली की कोई व्यवस्था नही थी।

करीब एक साल बाद बिजली तो आ गई लेकिन अन्य जरुरी सुविधाओं के लिए यहाँ के उद्योग आज भी इंतज़ार कर रहे हैं। क्षेत्र की सड़कें कई सालों से बदहाल हैं और कूड़ा डंप करने के लिए कोई चिन्हित जगह नही है। लोग अपने निजी साधनों से पानी का इंतजाम करते रहे हैं। नालियाँ भी टूट चुकी हैं। उद्यमी बंधु अपने खर्चे से यहाँ सफाई करवाते हैं। निगम का कोई भी सफाई कर्मी यहाँ तैनात नही है। कुल मिलाकर नगरनिगम और यूपीएसआईडीसी इस क्षेत्र में कुछ भी नहीं कराते हैं।

अमृत स्टील कमपाउंड औद्योगिक क्षेत्र के अध्यक्ष सत्यभूसण अग्रवाल ने बताया कि इस क्षेत्र की नालियों के लिए अवस्थापना निधि से 2 लाख 94 हजार का टेंडर पास हुआ था लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी अवस्थापना निधि का एक भी पैसा यहाँ खर्च नही हुआ है। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट्स भी नही हैं जिस वजह से रात के अँधेरे में लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती है।

सत्यभूसण ने बताया समय-समय पर अधिकारियों द्वारा इस क्षेत्र का निरीक्षण भी कराया जाता है लेकिन समस्याओं को देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है। यदि इस क्षेत्र में जल्द से जल्द बुनियादी आवश्यकताओं का इंतजाम नहीं कराया गया तो नए उद्योग तो यहाँ लगेंगे नहीं बल्कि पहले से लगे हुए उद्योग भी पलायन कर जायेंगे।

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