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मेरठ और गाज़ियाबाद की एक दर्जन बैंक शाखाओं की बढ़ी मुसीबत, भेजे गए नोटिस

मेरठ और गाज़ियाबाद की एक दर्जन बैंक शाखाओं की बढ़ी मुसीबत, भेजे गए नोटिस

मेरठ। लाइक के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में एस्टोनिस डिजीटल एडवरटाईजिंग सर्विस लिमिटेड नाम की फर्जी कंपनी का खुलासा होने के बाद मेरठ और गाजियाबाद की एक दर्जन बैंक शाखाएं रडार पर आ गई हैं। नोटबंदी के दौरान भी इन बैंक शाखाओं में करोड़ों रुपये की पुरानी रकम जमा की गई थी।

एसपी क्राइम शिवराम यादव ने शनिवार को इस फर्जी कंपनी का भंडोफोड़ करते हुए मुरादनगर निवासी प्रदीप सिंघल को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार यह फर्जी कंपनी पौंजी स्कीम का लालच देकर कंपनी ज्वाइन कराने और कंपनी में सैकड़ों लोगों की आईडी लगाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर चुकी है। मुख्य आरोपी राजकुमार यादव और नेहा चौधरी अभी तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ी हैं। महिला की लोकेशन गुड़गांव में बताई जा रही है।

एसपी क्राइम का कहना है कि आठ माह में करीब 23 करोड़ रुपये मेरठ और गाजियाबाद के बैंकों में जमा किया था। इनमें करीब सात करोड़ रुपया नोटबंदी के दौरान बैंकों में जमा किया गया, उसके बाद नया कैश निकाला व दूसरे खातों में ट्रांसफर किया गया।
एसपी क्राइम का कहना है कि क्राइम ब्रांच की तीन टीमों के अलावा साइबर सेल भी बैंकों की जांच में लगी है। फर्जी तरह से कंपनी के संचालक और अन्य लोगों ने अलग-अलग खातों में करोड़ों रुपये जमा किए और पैसा अन्य खातों में ट्रांसफर किया गया है।

बैंकों की जांच पड़ताल के लिए दो इंस्पेक्टर अलग से क्राइम ब्रांच के लगाए गये हैं। गिरोह के आरोपी अपने मोबाइल फ़ोन बंद करके लापता हैं। करोड़ों रुपये बैंकों में जमा करने और निकालने में अधिकांश पैसा सन 2016 और सन 2017 में जमा कर निकाला गया। ऐसे में तीन बैंकों में सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल रही है।

एसपी क्राइम ने बताया कि एक्सिस बैंक, आईडीबीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और इंडियन बैंक के खातों में पैसा जमा कर निकाला गया है। इन बैंकों के शाखा प्रबंधकों को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है कि किन लोगों के द्वारा पैसा जमा किया गया और किन खातों से पैसा निकाला गया और ट्रांसफर किया गया है।

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