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महिलाओं की पुकार- नहीं चाहिये सिर्फ एक दिन का सम्मान

महिलाओं की पुकार- नहीं चाहिये सिर्फ एक दिन का सम्मान

नई दिल्ली। 8 मार्च यानि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को सभी लोग अपनी मां, बहन, पत्नी, बेटी और महिला दोस्तों को शुभकामनाएं देते हैं लेकिन क्या सच में महिलाओं का असल जिंदगी में सम्मान किया जा रहा है। केवल एक दिन महिला दिवस की शुभकामनाएं देने से क्या उनका सम्मान होता है? सदियों से महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं। महिलाएं एक दिन के सम्मान की भूखी नहीं हैं, अगर देना है तो हर रोज उस बुरी नजर को हटाकर सम्मान दिया जाना चाहिए, जो कि उसे देखते ही अपनी हवस की भूख मिटाने के बारे में सोचती है।

अकेला सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया भर में महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं सुनने को मिलती हैं। महिलाओं के सम्मान की इतनी ही फिक्र है तो उन्हें बुरी नजर से देखना बंद करो, तभी महिलाओं को असली सम्मान मिलेगा। रेप, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, छेड़छाड़ जैसे कई मामले रोजाना दर्ज किए जाते हैं और कई तो ऐसे मामले हैं जो कि रिकॉर्ड ही नहीं होते। लड़की छोटे कपड़े पहनती है तो गलत सोच वाले पुरुषों को लगता है कि वह उन्हें न्योता दे रही है कि आओ मेरे साथ कुछ भी करो, मैं कुछ नहीं कहूंगी। ये समाज के लोग भी उसे टिप्पणी कसते हैं कि छोटे कपड़े पहनकर और रात में बाहर रहोगी तो तुम्हारे साथ ऐसा ही होगा। जब वहीं एक नवजात बच्ची को हवस का शिकार बनाया जाता है तो इसमें कौनसा बच्ची का कसूर होता है। वह कहां किसी को अपना बदन दिखा रही थी जो उसके साथ जघन्य अपराध को अंजाम दे दिया जाता है।

यदि वाकई में महिलाओं को सम्मान देना है तो इसकी शुरुआत आप अपने घर से करो, क्यों बेटों के लिए सभी चीजों की आजादी होती है? जो नियम कानून बेटी को हर कदम पर सिखाया जाता है कि कैसे चलना है, क्या पहनना है, कैसे बात करनी है, कैसे रहना है? यह सारे नियम कानून केवल लड़कों के लिए भी आज उतना ही जरुरी है, यदि हर घर में बेटों को अच्छी शिक्षा दी जाए तो वे महिलाओं का सम्मान अवश्य करेंगे।

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