ताज़ा खबर :
prev next

2012 में किया था घपला, जीडीए के 2 पूर्व वीसी के खिलाफ अब जाकर दर्ज हुई एफ़आईआर

2012 में किया था घपला, जीडीए के 2 पूर्व वीसी के खिलाफ अब जाकर दर्ज हुई एफ़आईआर

गाज़ियाबाद | गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के तत्कालीन वीसी ने वर्ष 2012 में दो उपाध्यक्षों के खिलाफ ख़रीदारी में घपला करने के आरोप में कार्यवाही की संस्तुति की थी मगर उत्तर प्रदेश में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार का यह आलम है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ अब जाकर कार्यवाही हुई है।
जीडीए के पूर्व सचिव राजकुमार सचान और नरेंद्र कुमार के खिलाफ मधुबन बापूधाम आवासीय योजना में जरूरत से ज्यादा सामान खरीदने और बाजार भाव से अधिक कीमत पर सामान खरीदने के आरोप में सिहानी गेट थाने में एफ़आईआर दर्ज की गई है। दोनों ही अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। “हमारा गाज़ियाबाद” ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था और इस बाबत लखनऊ में बैठे उच्चाधिकारियों से लगातार सवाल करते रहे हैं। हमारी लगातार पड़ताल का ही असर है कि अब जाकर शासन ने बिजली का सामान बिना सर्वे के जरूरत से ज्यादा खरीदने और प्राधिकरण को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के मामले में जीडीए को दो पूर्व सचिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया।

वहीं दो पूर्व सचिव पर मुकदमा दर्ज कराने के बाद इस घोटाले में शामिल अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी तलवार लटक गई है। बता दें कि इसी मामले में कुछ दिन पहले जीडीए उपाध्यक्ष रितु माहेश्वरी ने चार इंजीनियरों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई के लिए शासन को लिखा है। आरोपियों में जेई सतीश कुमार, असिस्टेंट इंजीनियर एसके सिंह, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर राधेश्याम शर्मा और सुपरिटेंडेंट इंजीनियर आरएस दिवाकर शामिल हैं।

“हमारा गाज़ियाबाद” की लगातार पड़ताल का असर यह हुआ कि मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार के निर्देश पर कार्यवाहक जीडीए वीसी रितु माहेश्वरी ने जांच करवाने के लिए जीडीए के अधिकारियों की एक कमेटी का गठन किया और कमेटी ने अपनी जांच में पाया गया कि आवश्यकता से अधिक बिजली का सामान होने पर तत्कालीन वीसी ने आदेश दिया था। जांच में पाया गया कि उक्त योजना के लिए जीडीए के गोदाम में पहले से ही बिजली की केबल मौजूद थी मगर वीसी के आदेश पर फिर से महंगी केबल खरीदी गई। जिसकी वजह से जीडीए पर 6 लाख 29 हजार 520 रुपये का अधिभार पड़ा है। वहीं, उक्त अभियंताओं ने मधुबन बापूधाम योजना में प्रस्तावित सामग्री की उपलब्धता का प्रमाणपत्र भी नहीं दिया था। इससे इस खरीददारी में उनकी सहभागिता की बात जांच में सामने आई। इसी आधार पर कार्रवाई लिए शासन को पत्र लिखा गया है। जिसमें चार इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जीडीए ने शासन को लिखा है।

हमारा मत

हमारा गाज़ियाबाद के पास ऐसे अनेकों दस्तावेज़ हैं जिससे यह साबित हो जाता है कि जीडीए में लगातार घोटाले हो रहे हैं। इस संबंध में हम मंडलायुक्त मेरठ से लेकर लखनऊ तक उच्च अधिकारियों के संपर्क में हैं और शीघ्र ही कुछ अन्य बड़े घोटालों का पर्दाफाश किया जाएगा।


आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो भी कर सकते हैं।

By हमारा गाज़ियाबाद ब्यूरो : Monday 26 फ़रवरी, 2018 04:45 AM