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शाबाश इंडिया – बच्चों ने श्रमदान और जेब खर्च के पैसों से बदल दिया पार्क का रंगरूप

शाबाश इंडिया – बच्चों ने श्रमदान और जेब खर्च के पैसों से बदल दिया पार्क का रंगरूप

गाज़ियाबाद | ट्रांस हिंडन एरिया के वसुंधरा क्षेत्र में अर्वाचीन स्कूल के बच्चों के आपसी सहयोग से बंजर पड़े एक पार्क की काया ही पलट दी है। वसुंधरा सेक्टर-12 स्थित अर्वाचीन स्कूल के 135 बच्चों ने अपनी मेहनत से और जेब खर्च बचाकर स्कूल के सामने का एक पार्क विकसित किया है। अब इस पार्क में बैठने के साथ बच्चे खेलते भी हैं। इस पार्क को विकसित करने में बच्चों को करीब डेढ़ साल का समय लगा।

स्कूल की प्रधानाचार्या साक्षी शर्मा ने बताया कि स्कूल के सामने ग्रीन बेल्ट में आवास विकास परिषद की ओर से एक पार्क चिन्हित किया गया था। लेकिन आवास विकास परिषद की ओर से एक बार भी पार्क का सौंदर्यीकरण नहीं किया गया। ऐसे में छुट्टी के समय बच्चों को स्कूल से लेने आने वाले अभिभावकों को धूप में खड़े होकर इंतजार करना पड़ता था। इसी स्कूल के कक्षा चार के छात्र सत्यम ने एक कहानी से प्रेरित होकर अपने जेबखर्च से थोड़ा-थोड़ा पैसा इकट्ठा करना शुरू किया। इसके साथ ही उसने पार्क में पौधों को लगाने के लिए अन्य बच्चों को पैसे इकट्ठे करने के लिए प्रेरित किया। ऐसा करके बच्चों ने पार्क में पौधे और घास को लगाने की इच्छा स्कूल प्रधानाचार्या के सामने रखी, जिसके बाद बच्चों ने स्कूल के हर कर्मचारी के जन्मदिन पर पौधे लगाने की प्रक्रिया शुरू की। अब वर्तमान समय में इस पार्क में करीब 50 पौधे लगे हुए हैं।

इस पार्क का सौंदर्यीकरण करने के लिए तीसरी, चौथी और पांचवीं कक्षा के बच्चों ने धीरे-धीरे करके पैसे एकत्र किए। इसके बाद सभी बच्चों ने स्कूल प्रबंधन के साथ मिलकर पार्क में झूले लगाए। पार्क में तीन झूले लगाए गए हैं। इसके अलावा बैठने के लिए पांच बेंच भी लगाई गई है। साक्षी ने बताया कि जब से बच्चों ने इस पार्क को विकसित किया है। तब से वह हर त्योहार इसी पार्क में ही मनाते हैं। इसके अलावा बच्चे समय-समय पर आसपास झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीब बच्चों को कपड़े और पुरानी किताब भी बांटते हैं।

स्कूल के ताइक्वांडो और कराटे कोच प्रेम बिष्ट ने बताया कि इस पार्क में बच्चे सप्ताह में एक दिन कराटे और ताइक्वांडो का अभ्यास भी करते हैं। इसके अलावा महीने में एक दिन इस पार्क बच्चों के लिए क्लास एक्टिविटी के तहत कवि सम्मेलन आयोजित किया जाता है, जिसमें नन्हें कवि अंग्रेजी और हिंदी की कविताओं का यहां बैठकर पाठ करते हैं।


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By हमारा गाज़ियाबाद ब्यूरो : Thursday 22 फ़रवरी, 2018 20:02 PM