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मेवाड़ इंस्टीट्यूट में हुआ मासिक विचार संगोष्ठी का आयोजन

मेवाड़ इंस्टीट्यूट में हुआ मासिक विचार संगोष्ठी का आयोजन

गाजियाबाद। वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस के विवेकानंद सभागार में मासिक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका संचालन अमित पाराशर ने किया। संगोष्ठी में दिल्ली इंस्टीट्यूट आॅफ रूरल डवलपमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. पवन विजय ने कहा कि कासगंज और केरल की घटनाएं धर्म को सही से न समझ पाने का नतीजा है।
आगे उन्होंने कहा कि धर्म विचार है कोई संगठन नहीं। धर्म सुख प्राप्त करने का एक यत्न है। धर्म परहित के लिए है। धर्म समझ, सम्बंध और भौतिक संसाधन पर टिका हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी राज्य का विस्तार करने के लिए धर्म को साधन के रूप में इस्तेमाल करना अशांति का द्योतक है।
वहीँ मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डाॅ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि धर्म और मजहब दोनों अलग-अलग हैं। साम्प्रदायिक होना धर्म नहीं कहलाता। धर्म केवल एक होता है और वह स्वाभाविक गुण होता है। देश की राजनीति धर्मानुसार होनी चाहिए, सम्प्रदाय अनुसार नहीं।
संगोष्ठी में गायत्री परिवार के वीएन मिश्रा ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डाॅ. अलका अग्रवाल, विवेक चंद्रा, नागेन्द्र सिंह समेत मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस का समस्त स्टाफ और विद्यार्थी मौजूद थे। मुख्य वक्ता डाॅ. पवन विजय को मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डाॅ. गदिया ने स्मृति चिह्न व शाॅल भेंटकर सम्मानित किया।

 

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