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दावोस में हिन्दी में बोले मोदी, डाटा को बताया सबसे बड़ी सम्पदा और सुरक्षा पर जताई चिंता

दावोस में हिन्दी में बोले मोदी, डाटा को बताया सबसे बड़ी सम्पदा और सुरक्षा पर जताई चिंता

दावोस | प्रदानमंत्री मोदी आज स्विटजरलैंड के दावोस शहर में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के 48वें समिट के प्लेनरी सेशन को संबोधित कर रहे हैं। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि सबसे पहले मैं क्लॉजश्वाब को उनकी इस पहल पर और डब्लूईएफ को एक सशक्त और व्यापक मंच बनाने पर बहुत-बहुत साधुवाद देता हूं। उनके विजन में एक महत्वकांक्षी एजेंडा है जिसका उद्देश्य है दुनिया के हालात सुधारना। उन्होंने इस एजेंडे को आर्थक और राजनीतिक चिंतन से बहुत मजबूती के साथ जोड़ दिया है। साथ ही साथ ही गर्मजोशी भरे स्वागत-सत्कार के लिए मैं स्विट्जरलैंड की सरकार और उसके नागरिकों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्ता करना चाहता हूं।
पीएम मोदी ने कहा कि दावोस में आख़िरी बार भारत के प्रधानमंत्री की यात्रा सन् 1997 में हुई थी, जब देवेगौड़ा जी यहां आए थे। 1997 में भारत का GDP सिर्फ़ 400 बिलियन डॉलर से कुछ अधिक था। अब दो दशकों बाद यह लगभग 6 गुना हो चुका है।पीएम मोदी ने कहा कि 1997 में भी दावोस अपने समय से आगे था, और यह World Economic Forum भविष्य का परिचायक था। आज भी दावोस अपने समय से आगे है। पीएम ने कहा कि इस वर्ष फोरम का विषय- ‘क्रियेटिंग ए शेयर्ड फ्यूचर इन ए फैक्चर्ड वर्ल्ड’ है। यानि दरारों से भरे विश्व में साझा भविष्य का निर्माण। नये-नये बदलावों से, नई-नई शक्तियों से आर्थक क्षमता और राजनैतिक शक्ति का संतुलन बदल रहा है। इससे विश्व के स्वरुप में दूरगामी परिवर्तनों की छवि दिखाई दे रही है। विश्व के सामने शांति, स्थिरता और सुरक्षा को लेकर नई और गंभीर चुनौतियां हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि व्यवहार, बातचीत और यहां तक कि अंतर्राष्ट्रीय समूहों और राजनीति तथा अर्थव्यवस्था तक को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। टेकनलॉजी के जोड़ने, मोड़ने और तोड़ने- तीनों आयामों का एक बड़ा उदाहरण सोशल मीडिया के प्रयोग में देखने को मिलता है। आज डाटा सबसे बड़ी संपदा है। डाटा के ग्लोबल फ्लो से सबसे बड़े अवसर बन रहे है और सबसे बड़ी चुनौती भी। पीएम मोदी ने कहा कि विज्ञान, तकनीक और आर्थिक प्रगति के नये आयामों में एक ओर तो मानव को समृद्धि के नये रास्ते दिखाने की क्षमता है। वहीं दूसरी ओर इन परिवर्तनों से ऐसी दरारों भी पैदा हुई हैं जो दर्द भरी चोट पहुंचा सकती हैं। बहुत से बदलाव ऐसी दीवारें खड़ी कर रहे हैं जिन्होंने पूरी मानवता के लिए शांति और समृद्धि के रास्ते को दुर्गम ही नहीं दुःसाध्य बना दिया है।

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By हमारा गाज़ियाबाद ब्यूरो : Thursday 22 फ़रवरी, 2018 14:27 PM