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इस ‘अम्बर मस्जिद’ में मुस्लिम महिलायें भी जाती हैं नमाज़ अदा करने

इस ‘अम्बर मस्जिद’ में मुस्लिम महिलायें भी जाती हैं नमाज़ अदा करने

लखनऊ। मुस्लिम महिलाओं के हक के लिए लड़ने वाली शाइस्ता अंबर को आज राजधानी लखनऊ में हर कोई जानता है। शाइस्ता अंबर ने लखनऊ में महिलाओं के नमाज़ पढ़ने के लिए एक ‘अम्बर मस्जिद’ का निर्माण कराया है। यहां हर शुक्रवार काफी संख्या में मुस्लिम महिलाएं नमाज़ पढ़ने आती हैं।

शाइस्ता अंबर ने ये मस्जिद बनाने के लिए कई मुश्किलें झेली हैं। इन्होने मस्जिद की ज़मीन खरीदने के लिए अपने गहने बेच दिए। परिवार ने तो हमेशा साथ दिया, लेकिन आसपास के लोगों ने खासकर धर्म के ठेकेदार बनने वाले परेशान थे। उन्हें इस बात से गुरेज था कि मुस्लिम महिलाओं के लिए मस्जिद क्यों बनाई जा रही है।

लाख कोशिशों के बाद आखिरकार 2005 में मस्जिद बनकर तैयार हो गई तो महिलाओं को मस्जिद तक लाना मुश्किल था। महिलाएं नहीं आती थी तो शाइस्ता ही मर्दों के साथ नमाज़ पढ़ती थीं। शाइस्ता समाज को यह बताना चाहती थी कि औरत को अल्लाह की तरफ से मस्जिद में नमाज़ पढ़ने से कोई मनाही नहीं है। धीरे-धीरे लोगों का जेहन बदलने लगा और महिलाएं नमाज में शामिल होने लगी।

मुस्लिम महिलाएं मस्जिद में नमाज क्यों नहीं पढ़ती हैं, इसके बारे में शाइस्ता अंबर का कहना है कि, देश में लड़कियों का साइकोलोजिकल तरीके से मिजाज बना दिया गया है कि औरतें घर में नमाज पढ़ें, लेकिन अगर कोई लड़की नौकरी कर रही हो और उसके ऑफिस के बगल में मस्जिद हो और वो वहां जाकर नमाज़ पढ़ना चाहे तो उसे किसी तरह की मनाही नहीं होनी चाहिए। इस्लाम के किसी भी किताब में औरतों के मस्जिद में नमाज पढ़ने पर पाबंदी नहीं है।

आज भी हमारे देश में कई ऐसे स्थान हैं जहां मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद जाकर नमाज पढ़ने पर पाबंदी है जबकि इस्लाम धर्म की किसी भी किताब में नही लिखा है कि औरतें मस्जिद में नमाज पढ़ने नहीं जा सकती। इस देश में मुस्लिम धर्मगुरुओं ने साइकोलोजिकल तरीके से मिजाज बना दिया गया है कि औरतें घर में नमाज पढ़ें। मुस्लिम महिलाओं के हक के लिए ये दकियानूसी सोंच बदलना बहुत जरुरी है।

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