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गुमशुदा बच्चों को तलाशने में सेंचुरी लगा चुका है यूपी पुलिस का इंस्पेक्टर सुनील दुबे

गुमशुदा बच्चों को तलाशने में सेंचुरी लगा चुका है यूपी पुलिस का इंस्पेक्टर सुनील दुबे

भदोही | भदोही में तैनात सुनील दुबे ने अपनी नौकरी के दौरान अनगिनत अपराधियों को पकड़ कर सजा दिलवाई है लेकिन उन्होंने अब तक 100 गुमशुदा बच्चों को खोजकर उनके परिजनों को सौंपा है। मेरठ कोतवाली में अपनी तैनाती के दौरान गुमशुदा बच्चों को खोजकर घरवालों से मिलाने की मुहिम शुरू करने वाले इस इंस्पेक्टर ने दो दिन पहले ऐसे बच्चों को खोजने की सेंचुरी लगा दी है।

अपने अब तक के सेवाकाल में सूबे के आठ जिलों के 33 थानों पर तैनाती के दौरान अपने सेवाकाल में सौवें गुमशुदा बच्चे की बरामदगी का काम भदोही के गोपीगंज कोतवाली में किया। गोपीगंज के पूरेटीका गांव के एक और बालक को तलाश कर उन्होंने सौ बच्चों को ढूंढ निकालने का शतक बना डाला है।
भदोही के गोपीगंज थाने पर तैनाती के दौरान इंस्पेक्टर सुनील दत्त दुबे अकेले इस जिले में अगस्त 2017 से अब तक 10 गुमशुदा बच्चों को मिला उनके घरवालों से मिलवा चुके हैं। बच्चों की गुमशुदगी के मामले में चंद समय में उन्हें ढूंढ निकालने में हासिल महारत ने उन्हें तमाम माता-पिता की दुआएं दिलाई हैं। सुनील का यह सफर वर्ष 1995 में मेरठ से शुरू हुआ था। गुमशुदा बच्चों की तलाश की यह मुहिम ‘आपरेशन तलाश’ को वे मेरठ, जौनपुर, मीरजापुर, सोनभद्र, भदोही समेत कुल आठ जिलों के 33 थानों पर सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचा चुके हैं। वर्तमान में गोपीगंज थाने में तैनात इंस्पेक्टर ने पूरेटीका निवासी नन्हकू बिन्द के पुत्र अविनाश उर्फ गौरी नामक (13 वर्ष) को तलाश किया है। यह रेकॉर्ड इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि सुरक्षा के साथ ही तमाम मामलों में पुलिस की जिम्मेदारी लगातार बढ़ी है।

बच्चों की गुमशुदगी के मामले के केस हैंडल करने में वह मेरठ के पूर्व एएसपी रणविजय सिंह से काफी प्रेरित हैं, जिन्होंने अब तक करीब चार सौ मामलों में सफलता का कीर्तिमान बनाया है। सुनील ने बताया कि एसएसपी इस तरह के केस पूरी रुचि से हैंडल करते रहे हैं। इस दौरान बच्चों के लिए कार्य करने वाली तमाम संस्थाओं का सराहनीय सहयोग मिलता रहा है।

नेशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो 2016 के आंकड़े बताते हैं कि यूपी में हर रोज औसतन आठ बच्चे लापता हो रहे हैं। इनमें से तीन कभी नहीं मिलते। गायब बच्चों में 33.5 प्रतिशत लड़कियां हैं। 2015 में जहां 2266 बच्चे लापता हो गए थे, वहीं 2016 में यह संख्या बढ़कर 3308 पहुंच गई। इनमें लड़के और लड़कियों की संख्या क्रमश: 1625 और 1683 थी।

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By हमारा गाज़ियाबाद ब्यूरो : Sunday 21 जनवरी, 2018 00:31 AM