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बुढ़ापे का मिसाल बने ये तीन शख्स, कमर झुकने के उम्र में पूरी की अपनी पढ़ाई

बुढ़ापे का मिसाल बने ये तीन शख्स, कमर झुकने के उम्र में पूरी की अपनी पढ़ाई

नई दिल्ली। कहते हैं कि जब जागो तभी सवेरा। ये खबर उन बुजुर्ग लोगों की है जिन्होंने कमर झुकने की अवस्था में अपनी पढ़ाई पूरी की है। बुढ़ापे की पर‍िभाषा बदलने वाले बुजुर्गों में एक नाम 98 साल के राजकुमार वैश्य का है। उत्‍तर प्रदेश में बरेली निवासी राजकुमार ने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से एमए (अर्थशास्त्र) की डिग्री हासिल कर ली है।

इसके ल‍िए इन्‍हें पटना में आयोजित एनओयू के दीक्षांत समारोह में मेघालय के राज्यपाल गंगा प्रसाद ने ड‍िग्री प्रदान की गई है। उम्र के इस पड़ाव में उनकी पढ़ने की चाहत जानने के बाद नालंदा खुला विश्वविद्यालय के अध‍िकार‍ियों ने 2015 में उनके घर पर जाकर नामांकन लिया था। राजकुमार का कहना है क‍ि इस उपलब्‍ध‍ि को पाकर वह काफी खुश हैं। वह कभी भी मेहनत करने में कमजोर नहीं पड़े। मास्‍टर ड‍िग्री हा‍स‍िल करना इनका सपना था। राजकुमार का नाम ल‍िम्‍का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज हो गया है।

इन्होने 105 साल की उम्र में की पीएचडी

ऐसे ही बुजुर्गों में ताइवान के रहने वाले झाओ मुहे का भी नाम शाम‍िल है। पिछले दिनों सोशल मीड‍िया पर यह काफी चर्चा में रहे झाओ ने 98 साल की उम्र में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा क‍िया और फिर पीएचडी हासिल करने का इरादा क‍िया। आखिरी में अपना सपना पूरा करते हुए उन्‍होंने 105 साल की उम्र में पीएचडी पूरी कर ली। जवानी में ज‍िम्‍मेदार‍ियों और रोजगार की आपाधापी में इनका पीएचडी करने का सपना अधूरा रह गया था। जिसे इन्‍होंने दोबारा उम्र के इस मोड़ पर पूरा किया और इसके ल‍िए दूसरों पर कभी न‍िर्भर नहीं हुए।

67 की उम्र में मास्टर डिग्री

इन सबके बाद तमिलनाडु की एक महिला 67 वर्षीय एम. चेल्लाताई के लिए स्‍नाकोत्‍तर की डिग्री पाना जूनून था, और उस जूनून को उन्होंने उम्र के इस पड़ाव पर आकर पूरा कर दिखाया। चेल्लाताई ने इस उम्र में एमए की डिग्री हासिल कर ये साबित कर दिया है कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती है। इस कामयाबी के पीछे उनके टूटे सपनों की दर्द भरी कहानी छिपी है।

दरअसल चेल्‍लाताई आज से करीब 50 साल पहले ही अपनी शिक्षा को पूरा करना चाहती थी, लेकिन उनके पिता ने उन्हें आगे पढ़ने की अनुमति नहीं दी। यहां तक कि क्वींस मैरी कॉलेज का फॉर्म उन्होंने ये कहकर फाड़ दिया कि उनके घर में लड़कियों को इतना नहीं पढ़ाया जाता। शादी के बाद चेल्लाताई ने अपने पति के सामने भी अपना सपना पूरा करने की इच्‍छा जताई पर उन्‍होंने भी साथ नहीं दिया।

बाद में पिता के निधन के बाद पति ने उन्हें तमिलनाडु सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन क्लर्क की नौकरी करने की अनुमति दे दी। 2009 में जब चेल्लाताई रिटायर हो गई तो एक बार फिर उन्होंने पति के सामने आगे पढ़ने की इच्छा जाहिर की इस बार 2013 में पति ने हां कर दी। इस तरह उन्‍होंने अपना सपना पूरा किया। अब मास्टर डिग्री लेने के बाद चेल्लाताई चाहती हैं कि वे कानून की पढ़ाई करें।

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By सचिन गुप्ता : Sunday 21 जनवरी, 2018 00:31 AM Updated