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शर्मनाक – 11वीं क्लास के बच्चे क्लास रूम में ही पी रहे थे हुक्का

शर्मनाक – 11वीं क्लास के बच्चे क्लास रूम में ही पी रहे थे हुक्का

गाज़ियाबाद | थोड़े समय में ही ज्यादा पैसे कमाने की लालसा ने गाज़ियाबाद पुलिस में तैनात कुछ अधिकारियों को इस हद तक गिरा दिया है कि अब स्थिति नियंत्रण से बाहर नज़र आ रही है। ये अधिकारी अपने अधिनिस्त कर्मचारियों को हर दिन एक निश्चित रकम के चढ़ावे का दबाव बनाए रखते हैं और निचले स्तर पर तैनात पुलिसकर्मी पैसा उघाने की मजबूरी में कुछ ऐसा कर बैठते हैं जिसका खामियाजा गाज़ियाबाद कि जनता को हो रहा है। पैसे का प्रवाह पुलिस चौकी से लेकर ऊपर तक लगातार बना हुआ है। अपराधी को पकड़ने से पहले उसकी हैसियत देखी जाती है और यदि ले-दे कर काम चल सकता है तो ज़्यादातर मामलों में दोषी को भारी रकम लेकर छोड़ दिया जाता है। इस लेनदेन से अंजान पीड़ित न्याय की आस में कभी थाने में तो कभी एसएसपी ऑफिस में चक्कर लगाता रहता है।

गाज़ियाबाद में पान बीड़ी की ज़्यादातर दुकानों में नशीले पदार्थ बड़ी आसानी से मिल जाते हैं। स्कूलों और कॉलेजों के बाहर तो साधारण हुक्के से लेकर चरस-गाँजा तक आसानी से उपलब्ध रहता है, जिनपर स्कूल प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। इसका परिणाम यह है कि छोटे-छोटे बच्चे भी नशे की लत का शिकार हो रहे हैं। कल साहिबाबाद के एक बड़े प्राइवेट स्कूल में ऐसा ही भयावह सच सामने आया। इस स्कूल की 11वीं क्लास में पढ़ने वाले कुछ लड़के-लड़कियां क्लासरूम में ही हुक्का पीते हुए पाये गए। घटना उत्साही बच्चों के वीडियो को व्हाट्स एप पर भेजने के बाद प्रकाश में आई। स्कूल प्रबंधन ने घटना की जांच कर दोषी बच्चों के खिलाफ कार्यवाही की बात कही तो बच्चों के माँ-बाप ने घटना की जानकारी होने से ही इंकार कर दिया है।

दरअसल सख्त क़ानूनों और अभिभावकों की दादागिरी के चलते अब स्कूली बच्चों पर अध्यापकों का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। स्कूलों की भूमिका अब चरित्र निर्माण न होकर सिर्फ शिक्षा देने तक सीमित रह गया है। बच्चों को गलती करने पर मारना तो दूर डांटने भर के लिए अभिभावक थाने में पहुँच जाते हैं। इसके लिए स्कूलों से ज्यादा अभिभावक ही दोषी हैं क्योंकि ज़्यादातर अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल या कॉलेज में एक कमाऊ इंजीनियर, डॉक्टर या आईएएस बनाने के लिए भेजते हैं एक जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए नहीं।

  • योगी सरकार आने के बावजूद भी गाज़ियाबाद भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों का गढ़ बना हुआ है।
  • लखनऊ में बैठे आला अधिकारी वस्तुस्थिति से अनभिज्ञ हैं और उनका सारा ध्यान अपनी कुर्सी बचाने में केन्द्रित है।
  • भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की अधिकता के चलते जिले में तैनात चंद ईमानदार पुलिस अधिकारी चाहकर भी कुछ कर पाने में असमर्थ है।
  • जाति के आधार पर हो रही नियुक्तियों के चलते अधिकारियों को राजनैतिक संरक्षण भी मिला हुआ है।

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By हमारा गाज़ियाबाद ब्यूरो : Sunday 22 अप्रैल, 2018 10:39 AM