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नहीं देना चाहते हैं महिलाओं को अधिकार, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को अब राज्यसभा से आसरा

नहीं देना चाहते हैं महिलाओं को अधिकार, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को अब राज्यसभा से आसरा

नई दिल्ली | देश के सभी प्रमुख विपक्षी दल मुसलमानों को खुश करने के लिए लोकसभा में ट्रिपल तलाक विधेयक का विरोध कर रहे थे। मगर भारतीय जनता पार्टी सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार मुस्लिम महिलाओं को उनका वाजिब हक दिलवाने के लिए मजबूर थी और वह आशा के अनुरूप लोकसभा में विधेयक पास कराने में कामयाब रही। इस विधेयक को पास कराने के लिए कॉंग्रेस पार्टी से मिला सहयोग आश्चर्यजनक रहा। कॉंग्रेस पार्टी ने अपनी परंपरागत मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति को छोड़ कर इस बिल को पास कराने में भाजपा का साथ दिया। मुस्लिम समाज सुधारकों को भी लग रहा है कि बिल को राज्यसभा में पास कराने में सरकार को कोई परेशानी नहीं आएगी।

उधर तीन तलाक पर प्रस्तावित कानून का विरोध कर रहे आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड को हाथ से जाती सत्ता नज़र आ रही है लेकिन बोर्ड के सदस्यों को राज्यसभा और राष्ट्रपति से भारी उम्मीद है। बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा कि लोकसभा में इस बिल पर जो बहस हुई उसमें कई गैर मुस्लिम सांसदों ने भी सदन को यह समझाने का पूरा प्रयास किया कि यह बिल मुस्लिम समुदाय खासतौर पर मुस्लिम महिलाओं के हित में नहीं है। मगर इसके बावजूद संख्या बल के आधार पर यह पारित हो गया। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा है कि केंद्र सरकार तीन तलाक के बहाने शरीयत में दखलअंदाजी कर रही है। दारुल उलूम अपनी पुरानी राय पर कायम रहते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ खड़ा है।

  • गुरुवार का दिन हिंदुस्तानी मुस्लिम महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक दिन रहा।
  • मुसलमानों को चाहिए कि वे सदियों पुरानी दक़ियानूसी विचारधाराओं को छोड़ कर समय के साथ चलें।
  • सामाजिक संगठनों को चाहिए कि वे धर्म-जाति का भेद किए बिना महिलाओं को अधिकार दिलाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए एकजुट होकर काम करें।

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By हमारा गाज़ियाबाद ब्यूरो : Monday 26 फ़रवरी, 2018 04:49 AM