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संपादकीय | गाज़ियाबाद के गुनहगार

दिल्ली पुलिस ने कई साल पहले एक फेसबुक पेज बनाया था जिस पर लोग ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों की तस्वीर लोकेशन के साथ डाल देते और पुलिस दोषी लोगों के खिलाफ चालान काट कर डाक से उनके घर भेज दिया करती थी। पुलिस के इस प्रयास का परिणाम यह हुआ कि सोशल मीडिया पर अपनी इन्सल्ट होते देख लोग ट्रैफिक रुल्स का पालन करने लगे। हालांकि इस प्रयास से ट्रैफिक पुलिसवालों की ऊपर की कमाई पर भारी असर पड़ा, मगर दुपहिया वाहन चालकों ने घर से निकलते ही हेलमेट पहनना और चौपहिया वाहन चालकों ने सीट बेल्ट लगाकर गाड़ी चलाना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे यह लोगों की आदतों में शुमार हो गया।

दिल्ली पुलिस के मुक़ाबले हमारे गाज़ियाबाद की पुलिस के पास न सिर्फ संसाधनो बल्कि कर्मचारियों की भी भारी कमी है। पुलिसकर्मियों के लिए संभव नहीं है कि वे यातायात के नियमों का उल्लंघन करने वालों, रोड़ी-बदरपुर की दुकानों से लेकर होटल ढाबों के नाम पर और पीर मज़ार से लेकर शनि, हनुमान और साईं मंदिर की इमारतें आदि बना कर अतिक्रमण करने वालों, देर रात तक संगीत बजाकर पड़ोसियों को परेशान करने वालों, सड़क रोक कर व्यक्तिगत समारोह करने वालों के खिलाफ कार्यवाही कर पाये। शायद संसाधनों के साथ-साथ गाज़ियाबाद पुलिस के पास इच्छा शक्ति की भी भारी कमी है। लखनऊ पुलिस ने बड़े ज़ोर-शोर के साथ गाज़ियाबाद में ई-चालान का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। मगर आधुनिक तकनीक में कम रुचि और चालान काटने से ऊपर की आमदनी कम होने के डर से अभी तक यह योजना शुरू नहीं हो पाई है और इसका नतीजा आपके सामने है। हमारे देश में प्रति मिनट एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना में जान गवांता है और हमारा शहर गाज़ियाबाद भी सड़क दुर्घटनाओं और रोड रेज़ के मामलों के कारण रोज़ रोज़ ख़बरों में रहता है।

लेकिन अगर गाज़ियाबाद पुलिस कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर रही है या नहीं कर पा रही है तो इसका मतलब यह नहीं कि हम गाज़ियाबाद के कानून प्रिय और जिम्मेदार नागरिक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें। आखिर किसी और की गलती की सज़ा किसी निर्दोष को क्यों मिले ? रौंग साइड से आने वालों को आप की जान लेने या हाथ पैर तोड़ देने का हक़ आखिर किसने दिया ? हाई बीम पर गाडी चलाने वाले की बेवकूफी से जब कोई बाइक सवार घायल होता है तो क्या कोई समझ पाता है कि आँखे चुंधिया जाने के कारण बाइक सवार सडक पर बने गढ्ढे को नहीं देख पाया ? ऐसे ही अतिक्रमण या जुलूसों के कारण सड़कों पर रोज़ रोज़ लगते ट्रैफिक जाम का दंश वहां से गुजरने वालों को नाहक ही झेलना पड़ता है।

आम आदमी के इन छोटे-छोटे अपराधों की बहुत बड़ी सजा कोई और निर्दोष इंसान आये दिन भरता है. सड़क पर लगे जाम के कारण हर रोज़ कोई मरीज़ रास्ते में दम तोड़ता है और सज़ा किसी को नहीं मिल पाती. कुल मिला कर मुझे लगता है कि आम आदमी का सुधरना अब बहुत ज़रूरी हो चुका है. इसी सोच के साथ हमने “गाज़ियाबाद के गुनहगार” (facebook.com/GhaziabadKeGunahgaar/) के नाम से एक फेसबुक पेज बनाया है। अब आप सभी जिम्मेदार गाजियाबादियों से गुजारिश है कि वे इस पेज पर कानून तोड़कर गाज़ियाबाद को बदनाम करने वालों की फोटो लोकेशन के साथ डाल दें ,हो सकता है कि सार्वजनिक रूप से बदनाम होने के डर से ही इन गाज़ियाबाद के गुनहगारों को कुछ शर्म आ जाए।

आपका अपना
अनिल कुमार

By अनिल कुमार (पब्लिशर व एडिटर-इन-चीफ) : Monday 22 जनवरी, 2018 06:06 AM Updated