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शिक्षा का हक, खेल का हक तो क्यों न हमें मिले आराम का भी हक

शिक्षा का हक, खेल का हक तो क्यों न हमें मिले आराम का भी हक

गाज़ियाबाद | आप को यह जानकार आश्चर्य होगा कि दक्षिण कोरिया सरकार अपने देश के नागरिकों को आराम का हक देने की योजना बना रही है। इस विषय पर आगे चर्चा करने से पहले हम आपको बता दें कि दक्षिण कोरिया में आम नागरिक औसतन हर हफ्ते 68 घंटे और साल में 2,069 घंटे काम करता है जो की विश्व में दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर मेक्सिको है जहां के लोग साल में लगभग 2,255 घंटे काम करते हैं।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन इन दिनों अपने देश में एक ऐसा कानून बनाने के प्रयास में हैं जिसके माध्यम से हर हफ्ते काम के घंटो को 68 से घटा कर 52 पर लाया जा सके। जो नागरिक हर हफ्ते 52 घंटो से ज्यादा काम करना चाहते हैं उन्हें काम के हर घंटे के बदले डेढ़ गुणी तंख्वाह मिले। जबकि दक्षिण कोरिया की लेबर यूनियनों का संगठन अतिरिक्त घंटों के बदले दोगुनी तंख्वाह की मांग कर रहा है।

दरअसल एक समय था जब आर्थिक तरक्की के लिए काम के ज्यादा घंटो को जरूरी माना जाता था। यही कारण है कि भारत समेत सभी प्रगतिशील देशों में लोग दिन का लंबा समय काम करने में बिताते हैं। जबकि अब यह माना जाता है कि दिन में लगातार लंबे समय तक काम करने से व्यक्ति क्षमता कम होती है। वह समय से पहले बूढ़ा हो जाता है और उसकी सोशल लाइफ खत्म हो जाती है जिसकी वजह से हमेशा तनावग्रस्त भी रहता है।

हमारी राय
हम भारतीय भी अपने दिन का ज़्यादातर काम करते हुए ही बिताते हैं। आम भारतीय कंपनियों में सुबह ऑफिस पहुँचने का समय तो निश्चित होता है मगर शाम को घर जाने का कोई समय नियत नहीं होता है। यदि कोई व्यक्ति समय से ऑफिस आने और जाने की बात करे तो कंपनी मालिक उसे हेय दृष्टि से देखते हैं। बेहतर होगा की हम भारतीय भी अपने काम करने और कराने दोनों ही के तरीके बदलें। एक बात और आप हर रोज 8 घंटे काम करें या 12 घंटे, जितने घंटे भी काम पर रहें उसका हर मिनिट काम करने ही में व्यतीत हो तो आप भी खुश रहेंगे और मालिक भी।

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By हमारा गाज़ियाबाद ब्यूरो : Monday 26 फ़रवरी, 2018 04:49 AM