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एक हाथ नहीं है फिर भी अपने सपने को पूरा कर दिखाया बिहार की ‘संजना’ ने

एक हाथ नहीं है फिर भी अपने सपने को पूरा कर दिखाया बिहार की ‘संजना’ ने

बिहार आइये आज आपको बिहार के एक छोटे से शहर आरा’ की लड़की संजना के संघर्ष और जीवन की कहानी सुनाते हैं, जिन्होंने बचपन में ही एक ट्रेन हादसे में अपना दाहिना हाथ खो दिया था। इतने बड़े हादसे की शिकार संजना के पास हौसले की कोई कमी नहीं है। जब यह हादसा हुआ तब संजना महज 9 माह की थी। होश सँभालने पर उन्हें दुनिया ने ये अहसास कराना शुरु कर दिया की वो लाचार हैं और उनमें बहुत बड़ी कमी है लेकिन संजना ने दुनिया वालों की ऐसी बातें सुनते हुए भी अपने आप को कभी किसी से कम नहीं समझा इसके उलट उन्होंने अपने आपको एक आम लड़की की तरह माना जो कुछ भी हासिल कर सकती है

आप को जान कर अच्छा लगेगा की संजना मेरी बचपन की सहेली है और उसके पिता मेरे पापा के मित्र हैं। संजना ने मेरे साथ ही आरा के कैथोलिक मिशन स्कूल से अपनी 10 तक की पढ़ाई पूरी की है पढ़ाई में वह कक्षा के हर बच्चे से अव्वल रहती थीपढ़ाई के अलावा भी वो हर काम को पूरे दिल से करती थी। पढ़ाई के दौरान स्कूल में एक कार्यक्रम के लिए हम बच्चों ने डांस की प्रेक्टिस की लेकिन संजना को ये कहकर उस कार्यक्रम में भाग नहीं लेने दिया गया की तुमसे नहीं होगा संजना को ये बात बहुत बुरी लगी और वो बहुत रोई लेकिन उस के बाद फिर उस ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा

संजना को स्पोर्ट्स में भी शुरू से बेहद रूचि रही और वो अपने बचे हुए दायें हाथ से खेलते हुए स्कूल में बैडमिंटन चैंपियन भी बनी स्कूल के बाद संजना ने अपनी पढ़ाई पटना यूनिवर्सिटी से पूरी की और आज वो दिल्ली में एक फाइनेंस कंपनी में मैनेजर हैं। नौकरी ढूँढ़ते हुए भी उसे कई मीठे कडवे अनुभव हुए। संजना ने एक कंपनी में इन्टरव्यू दिया और वो सेलेक्ट हो गई। जो सेलरी संजना को ऑफर हुई थी वो उसकी योग्यता से बहुत ज़्यादा थी और इस बात से वो हैरान भी थी खैर पहले दिन ऑफिस में सब कुछ ठीक ठाक था और वो बहुत खुश थी लेकिन दूसरे ही दिन कंपनी के मैनेजर के गलत मंसूबे ने संजना के होश उड़ा दिए। संजना ने उस नौकरी को लात मारी और सीधे अपने घर चली आई संजना की कोशिश रंग लायी और आज वह दिल्ली के  HDB FINANCIAL SERVICES में मैनेजर के पोस्ट पर हैं। संजना के काम से उसके ऑफिस में सभी खुश रहते हैं और वो भी सबको अपना परिवार मानकर रहती हैं

‘संजना’ अब 25 वर्ष की हो चुकी है और अपनी जिंदगी से बहुत खुश है हाँ लेकिन उसे ये सुनना बहुत बुरा लगता है जैसे- संजना की अब शादी करने की उम्र हो गई है लेकिन लड़की में कमी है तो लड़का भी वैसा ही ढूँढना पड़ेगा। यह बात उन्हें कचोटती है। उन्हें किसी से मदद मांगने की आज कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि वह अपने आप को हर कार्य के लिए पहले से ही तैयार कर लेती हैं।

सुझाव- कोई घटना या अनहोनी कब किसके साथ घट जाए यह कोई नहीं जनता लेकिन हम उसके जिम्मेदार उन लोगों को नहीं मान सकते। जब हम उनके दर्द को समझ नहीं रहे तो हम उन्हें तरह-तरह की बातों से क्यों दुखी कर रहें हैं। उन लोगों के संघर्ष को समझना चाहिए उन्हें भी समाज का एक महत्वपूर्ण भाग मानना चाहिए, सभी की मदद करें एक जुट होकर रहें। हमारा गाज़ियाबाद की टीम दुनिया भर में विकलांग लोगों के बीच उम्मीद और भरोसा जगाने की दिशा में काम करती है। आप भी हमारी इस मुहिम में अपना साथ दे सकते हैं। यदि आपके आस-पास भी ऐसे महान व्यक्तित्व हैं तो उनकी कहानी हमें इस www.hamaraghaziabad.com पते पर भेज दें।

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