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प्रदूषित शहरों में फिर से टॉप पर पहुंचा गाज़ियाबाद, प्रशासन के सभी प्रयास हो रहे हैं नाकाम

प्रदूषित शहरों में फिर से टॉप पर पहुंचा गाज़ियाबाद, प्रशासन के सभी प्रयास हो रहे हैं नाकाम

गाज़ियाबाद | गाज़ियाबाद शहर एक बार फिर से देश के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में टॉप पहुँच गया है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को गाज़ियाबाद का एयर क्वालिटी इंडेक्स 473 पर पहुँच गया जो की एक खतरनाक स्थिति है। गाज़ियाबाद के अलावा लखनऊ, कानपुर, मुजफ्फरपुर, और वाराणसी में भी पर्यावरण की स्थिति घातक बनी हुई है। गहरी धुंध और हवा न चलने के कारण गाज़ियाबाद की स्थिति और खराब हो गई है।
ऐसा नहीं है कि पर्यावरण से प्रदूषण को कम करने के लिए जिला प्रशासन कुछ नहीं कर रहा है, मगर पूर्ववर्ती अधिकारियों की बरसों की अनदेखी से अब प्रशासन द्वारा किए जा रहे सभी प्रयास बेकार साबित हो रहे हैं। इन मामलों में सबसे ज्यादा दोषी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ही नज़र आता है। बोर्ड द्वारा गाज़ियाबाद में अब तक तैनात अधिकतर अधिकारियों का सारा ध्यान सिर्फ अपने और अपने राजनैतिक आकाओं के लिए पैसे बटोरने में ही लगा रहा। नतीजा यह हुआ कि आज शहर के लगभग हर औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली ऐसी दर्जनों इकाइयां चल रही हैं जिनके प्रदूषण नियंत्रण विभाग या जिला प्रशासन के रेकॉर्ड्स में कोई अस्तित्व ही नहीं है। इनके बारे में जिला प्रशासन के पास कोई सूचना न होने के कारण ये इकाइयां हमेशा ग्रीन कोर्ट के आदेशों से भी बची रहती हैं, क्योंकि अदालती आदेश सिर्फ उन्हीं इकाइयों पर लागू होते हैं जिनका रेकॉर्ड सरकार के पास होगा। यदि जिला प्रशासन और राष्ट्रीय हरित अभिकरण गाज़ियाबाद की आबोहवा को बेहतर बनाने के लिए गंभीर है तो उसे सबसे पहले गाज़ियाबाद जिले में चल रहे सभी छोटे-बड़े कारखानों की लिस्ट बनानी होगी। इससे न केवल सभी इकाइयां प्रशासन के रडार में आ जाएंगी बल्कि जिला प्रशासन के रेवेन्यू कलेक्शन में भी बढ़ौती होगी।

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