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लव जिहाद – राजस्थान हाई कोर्ट ने धर्म परिवर्तन कर शादी करने के बनाए नियम

लव जिहाद – राजस्थान हाई कोर्ट ने धर्म परिवर्तन कर शादी करने के बनाए नियम

जयपुर | राजस्थान हाई कोर्ट ने धर्म परिवर्तन कर और दूसरे धर्म में विवाह करने के लिए नियमावली जारी कर दी है। अदालत ने कहा है कि जब तक राज्य सरकार धर्म परिवर्तन को लेकर कानून नहीं बना लेती है, तब तक अदालत के नियमों को माना जाए। कोर्ट ने यह नियम कथित लव जिहाद के एक मामले की सुनवाई करते समय दिए।

क्या हैं नियम?

राजस्थान के अंदर किसी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने के लिए जिला कलेक्टर, सब डिविजनल मैजिस्ट्रेट या सब डिविजनल ऑफिसर को सूचित करना होगा। अधिकारी यह जानकारी नोटिस बोर्ड पर लगाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि धर्म किसी दबाव में बदला न जा रहा हो।
धर्म परिवर्तन के एक हफ्ते बाद शादी की जा सकेगी। ऐसी शादी कराने वाले व्यक्ति को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि धर्म परिवर्तन की जानकारी प्रशासन को दी गई हो। अगर शादी में किसी नियम का पालन नहीं हुआ तो उसे रद्द माना जाएगा।

याचिकाकर्ता चिराग सिंघवी ने कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया था कि उनकी बहन पायल का फैज मोदी के साथ निकाह कराने के लिए जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। कोर्ट ने दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए ऐसा किया जा रहा है। चिराग की बहन पायल ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में 10 रुपये मूल्य के स्टांप पेपर पर एफिडेविट बनाकर इस्लाम कबूल कर अरीफा बनने की जानकारी दी थी। हाई कोर्ट के जज गोपाल कृष्ण व्यास ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा, ‘इस तरह से तो मैं भी खुद को गोपाल मोहम्मद कहना शुरू कर सकता हूं।’

जस्टिस व्यास और जस्टिस वी के माथुर की बेंच ने शुक्रवार को कहा, ‘हमें पता है कि संविधान के अनुच्छेद 25 में भारतीय नागरिक को किसी भी धर्म का पालन करने की आजादी है लेकिन सवाल यह है कि क्या शादी करने के लिए जबरन धर्म परिवर्तन सही है या नहीं और जवाब है, ‘नहीं।” बेंच ने कहा कि सभी धर्मों में शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन कराना जरूरी नहीं होता। उन्होंने मामले की सुनवाई करते हुए इस बात पर हैरानी जताई कि आधे घंटे के अंदर धर्म परिवर्तन सहित निकाह भी करा लिया गया। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि पायल और फैज दोनों बालिग हैं और कोर्ट के निर्देशों का उनके अधिकारों पर असर नहीं होगा।


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