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निर्भया कांड के पांच साल बाद भी महिला सुरक्षा के नाम पर खोखला होता कानून

निर्भया कांड के पांच साल बाद भी महिला सुरक्षा के नाम पर खोखला होता कानून

गाज़ियाबाद। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस की तमाम घोषणाएं-अभियान सिर्फ कागजों के रिकॉर्ड तक ही सीमित हैं। पांच साल बाद भी राजधानी में दुष्कर्म की घटनाएं कम नहीं हुई हैं। छेड़छाड़, अश्लील इशारे और दहेज हत्या में भी वृद्धि हुई है। निर्भया कांड के बाद और 5 ऐसी ही घटनाये दोहराई गई जिसने सभी को झकझोर कर रख दी। आईये जानते हैं महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कुछ जरुरी बदलाव किये गए लेकिन ज्यादा समय तक नहीं चल पाए-

बालिका स्कूल, कॉलेज व इंस्टीट्यूट में चलने वाले अभियान के तहत छात्राओं को गुड व बैड टच की जानकारी देना शुरु किया गया लेकिन कुछ दिनों बाद ही इस अभियान को बंद कर दिया है। भीड़भाड़ वाले बाजारों, बस स्टैंड व मॉल्स के आसपास सादी वर्दी में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती होती थी। लेकिन इस अभियान का नतीजा भी असफल रहा। पुलिस ने सादी वर्दी की जगह वर्दी में महिला पुलिसकर्मियों को पेट्र्रोलिंग के लिए उतारने व कुछ खास जगहों पर तैनाती का निर्णय लिया है जो शयद ही कभी पूरा होगा।

 इसके अलावा महिला संगठनों व अन्य समाज सेवी संगठनों के साथ मिलकर महिलाओं की समस्याओं का निदान किया जाता था। वहीं, इस अभियान को महिलाओं तक सीमित रखने के बजाए जनसंपर्क अभियान का हिस्सा बना दिया गया है। राजधानी की महिलाओं व युवतियों को आत्मरक्षार्थ प्रशिक्षण मुहैया कराना, जो अब ‘सशक्ति’ अभियान के नाम से चलाया जा रहा है। इसके तहत पुलिस हर इलाके में महिलाओं, युवतियों व छोटी बच्चियों को भी आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे रही है।

दिल्ली में हुई इस घटना के तुरंत बाद ही महिला पुलिसकर्मियों से लैस पीसीआर की शुरुआत की गई। इसमें चालक, गनमैन और जांच अधिकारी सभी महिलाएं हैं। सुबह-शाम के वक्त पीक आवर्स में जहां महिलाओं की उपस्थिति ज्यादा होती है, वहां पेयर्ड पेट्रोलिंग की शुरुआत कर दी गई।

आम आदमी दोष प्रशासन को ही देगा क्योंकि अपराधियों को सबक सिखाने की ताकत उनमें नहीं है। जिस तरह देश की सेवा के लिए बॉर्डर पर सैनिक तैनात किये जाते है, ठीक उसी तरह लोगों की हिफाजत के लिये भी देश में पुलिस-प्रशासन बनाए गए हैं। लेकिन कहीं न कहीं वह अपने इस कर्तव्यों को समझ नहीं पा रहे हैं जिससे निर्भया जैसी घटनाएं फिर से दोहराई जा रही हैं। ऐसा फिर से न हो इसके लिए देश में सख्त कानून बनाने की आवश्यकता है।

 

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