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अपनों ने समझा बोझ तो गैरों ने दिया आसरा, नहर में फेंकी बच्ची को मिला माँ का प्यार

अपनों ने समझा बोझ तो गैरों ने दिया आसरा, नहर में फेंकी बच्ची को मिला माँ का प्यार

उरई | आज के युग में जहां बेटियां देश का नाम रोशन कर रही है तो वहीं कुछ लोग आज भी बेटियों को बोझ समझ रहे है। पंडौरा गांव में भी एक मां ने बेटी को बोझ समझा और उसे नहर में फेंक दिया लेकिन गाँव की ही एक अन्य महिला सीमा ने बड़ा दिल दिखाया और उसे अपनाकर यह साबित कर दिया कि बेटी अभिशाप नहीं है।
पंडौरा गांव स्थित नहर में एक नवजात बच्ची मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। नवजात कपडे़ में लिपटा हुआ था। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात को कब्जे में लेकर स्वास्थ्य परीक्षण के लिए अस्पताल ले आई। इसी दौरान पंडौरा गांव निवासी दंपति सीमा और श्रीराम थाने आए और उन्होंने नवजात को अपनाने की बात कही। पुलिस के बताया कि दंपति के कोई संतान नहीं है। लिहाजा पुलिस ने दंपति के बारे में छानबीन की। इसके बाद नवजात बच्ची को सौंपने की कागजी कार्रवाई शुरू की।
बेटी को अपनाने के बाद सीमा बोली अब मैं भी मां बन गई हूं। यह बेटी मेरे जिगर का टुकड़ा रहेगी और पूरे जीवन यह नहीं जान पाएगी कि मैं लावारिस थी। अपनी ओर से परवरिश में कोई कोर कसर नहीं छोड़ूंगी। इसी के साथ उसनें कहा कि वह मां अभागिन है जिसने नन्हीं जान को जिसे अपनी कोख से जन्म दिया और फिर मरने के लिए छोड़ दिया।


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