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शाबाश गाजियाबाद:-मैकेनिक संजय सिंह जो पैरों से सही करते हैं लोगों की बाइक

शाबाश गाजियाबाद:-मैकेनिक संजय सिंह जो पैरों से सही करते हैं लोगों की बाइक

गाजियाबाद। “कौन कहता है कि आसमान में सुराख़ नही हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों..!” दुष्यंत कुमार की ये लाइनें जीवन में वो सभी काम करने की प्रेरणा देती हैं जिसको करने से इन्सान अक्सर कतराता है। आज हम आपको ऐसे ही शख्स की कहानी से रुबरु करवाने जा रहे हैं जो दोनों हांथो से लाचार है लेकिन फिर भी 50 की उम्र में बेफिक्र जिन्दगी जिए जा रहा है।

ये कहानी है गौशाला फाटक पर रहने वाले संजय सिंह की जिसने महज 6 वर्ष की उम्र में एक हादसे के दौरान अपने दोनों हाथ खो दिए। ये हादसा कब और कैसे हुआ इस बारे में संजय सिंह को कुछ नही पता। संजय बताते हैं कि बचपन से मैंने खुद को ऐसी ही देखा है। इन्होने पढ़ाई केवल पांचवी क्लास तक की है। पढ़ाई छोड़ने के बाद और अपनी यह हालत देखकर संजय सिंह को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी।

आख़िरकार इनके बड़े भाई ने इनका हौंसला बढ़ाया और अपने काम में इनको लगा लिया। संजय सिंह के भाई बाइक मैकेनिक हैं। बड़े भाई को बाइक रिपेयर करते देख इन्होने भी इसी काम में अपनी रूचि दिखानी शुरु कर दी। अपने भाई के काम में हाँथ बटाने के साथ धीरे-धीरे बाइक रिपेयर करना शुरु कर दिया। भाई ने भी इनका पूरा साथ दिया और अपनी तरह इनको भी काबिल बना दिया।

हैरानी की बात ये है कि संजय सिंह बाइक रिपयेरिंग का पूरा काम अपने पैर से करते हैं। दोनों हाथों में इनका दायाँ हाँथ केवल कुहनीभर है। इनका ये हाँथ और बायाँ पैर ही दैनिक जीवन के सारे काम करता है, और इसी से ही संजय सिंह चुटकियों में लोगों की बाइक सही करते हैं। सबसे ज्यादा इनका पैर ही हर काम में यूज होता है। पैर से रोटी खाते हैं और कुहनी वाले हाथ से नहाते हैं। इन्होने अपनी दुकान का खोखा एमएमजी अस्पताल के सामने लगा रखा है।

लोगों की बाइक अपने पैर के हुनर से चंद मिनटों में यहीं सही कर देते हैं। इसी काम से महीने का 12 हजार कमाते हैं। खुद का ही घर बना रखा है। बैंक खाते में हर महीने विकलांग पेंशन का 3 हजार आता है। इन सबसे ही घर का खर्च चलता है। दो बच्चे हैं जिनको संजय सिंह उच्च शिक्षा दिलाना चाहते हैं। टीम से बात करते हुए संजय बताते हैं कि अब इस जिदंगी की आदत हो चुकी है। न इस जिन्दगी से कोई गुरेज है और न भविष्य में कभी होगा।

संजय सिंह की जिन्दगी उन लाचार लोगों के लिए प्रेरणा है जो पैर की हड्डी टूट जाने पर भी खुद को निकम्मा साबित कर देते हैं। वास्तव में इनकी ये जिन्दगी बताती है कि इन्सान विपरीत परिस्थितियों में भी सूकून से जी सकता है। पढ़िए, सोचिए, विचार करिए और ऐसे लोगों के जीवन से खुद को बदल कर देखिये।

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