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मेरी आवाज़ सुनो

मेरी आवाज़ सुनो

मैं गाज़ियाबाद हूँ, आप का शहर और आपका बसेरा। मुझे आप से कुछ कहना है।

मुझे उन लोगों से कोई शिकायत नहीं है जो मेरा रंग रूप बिगाड़ा करते हैं। मेरी आबोहवा को जहरीला बनाने वालों से भी मुझे कुछ नहीं कहना। रोड रूल्स को तोड़ने वालों से भी बात नहीं करनी मुझे। मुझे भ्रष्ट अधिकारियों और रिश्वत बाँट कर दूसरों का हक़ मारने वालों से भी बात नहीं करनी। सरकारी ज़मीनों पर अतिक्रमण कर नए-नए पूजा स्थल बनाने वालों से कुछ कहने का भी कोई फायदा नहीं नज़र आता मुझे। नेताओं से बात करके भी मेरा कुछ भला नहीं होने वाला। गरीब बेबस जनता को लूटने में लगे डाक्टर, वकील, पुलिस वालों और गुंडों को भी कुछ कहने का फायदा नहीं होगा। तो आज मैं आभार व्यक्त करूंगा और थैंक यू बोलूंगा….

उन नौजवानों को जो बिना किसी लोभ लालच के मेरा रूप निखारने में लगे हैं। ये बच्चे उन बदरंग दीवारों को सुन्दर चित्रों से सज़ा रहे हैं जिन दीवारों को कुछ बड़े लोगों ने खराब कर दिया था। शाबाशी देना चाहता हूँ उन वकीलों को जो बिना किसी लालच के किसी लाचार का केस लड़ कर उसे इन्साफ दिलवाते हैं। मेरे आशीर्वाद के पात्र हैं वे डॉक्टर जो गरीबों से अपनी फीस लिए बिना उनका इलाज करते हैं। मोहल्ले के पार्कों को हरा भरा रखने में जुटे वे लोग जो हर काम में सरकार की तरफ नहीं देखते मुझे उन पर नाज़ है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को किताबें और ज़रूरी सामान देने वाले मुझे बहुत अच्छे लगते हैं। वे सरकारी अफसर मेरी शान हैं जो सिर्फ और सिर्फ अपना कर्तव्य निभाते हैं और लोगों की सेवा कर के अपने आप को धन्य समझते हैं। वे पत्रकार जो पूरी ईमानदारी से सच को सामने लाते हैं और इसके लिए कई बार भारी कीमत भी चुकाते हैं उनको मेरा आशीर्वाद।

वे भले लोग जो अपने घर के सामने तो सफाई रखते ही हैं साथ ही मोहल्ले की सफाई में भी अपना सहयोग देते हैं, वे मुझे बहुत प्रिय हैं। सड़कों पर अपनी लेन में चलने वाले जो हमेशा अपने साथ दूसरे यात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखते हैं उन्हें मैं बहुत पसंद करता हूँ। रेल फाटकों पर शान्ति और सब्र से अपनी लाइन में खड़े रहने वाले बहुत कम हैं पर जितने भी हैं उन पर मुझे नाज़ है। अपने पालतू जानवरों को दूसरों के घरों के सामने पौटी ना करवाने वाले भी बहुत कम हैं पर जो हैं उन को मेरा सलाम। मोहल्ले में अपने पड़ोसियों को भाई जैसा मानने वाले मुझे बहुत प्रिय हैं। ऐसे लोगों की वजह से ही शहर में सब प्रेम से रह पाते हैं।

अपनी कारों में काले शीशे ना लगवा कर महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों को रोकने वाले लोग भी बहुत अच्छे लगते हैं मुझे। सड़क पर घायल हुए किसी अपरिचित को अस्पताल पहुंचाने वाले तो किसी फ़रिश्ते से कम नहीं लगते मुझे। रात को गाड़ी चलाते हुए अपनी गाड़ी की लाईट को लो बीम पर रखने वाले बहुत समझदार और संवेदन शील लगते हैं मुझे। बिना बात हॉर्न ना बजाने वाले, सही तरीके से ओवरटेक करने वाले, रेड लाइट्स जम्प ना करने वाले, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल करने वालों का तो मैं फैन हूँ। घर से कपड़े या जूट का थैला ले कर जाने वाले जो पोलीथिन की थैलियों का प्रयोग नहीं करते वे भी बहुत उम्दा किस्म के लोग होते हैं। गुटका ना खाने वाले लोग भी मुझ पर बहुत उपकार करते हैं। इन्हें बार-बार और जगह-जगह थूकना नहीं पड़ता इसलिए बिना कुछ करे ही ये शहर को साफ़ रखने में बहुत सहयोग देते हैं। महिलाएं और बच्चियों से छेड़छाड़ करने वाले अपराधियों को मौके पर ही पकड़ कर पुलिस के हवाले करने वाले लोग मुझे असली मर्द दिखाई पड़ते हैं।

तो आप समझ ही गए होंगे कि हर वो शख्स जो मेरे बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों का ध्यान रखता है वे मुझे बहुत प्यारा है। ऐसे लोग और बढ़ें और बढ़ते ही जाएं बस यही कामना है मेरी। मैंने सुना है कि जो चीज़ चाहिए और जिस तरह के लोग हमें चाहिये हमें उनके बारे में ही बात करनी चाहिए इस लिए मैंने अपनी पसंद आप के सामने रखी है। अब ये आप का फैसला है कि आप को किस तरह का आदमी बनना है।

आप ने मेरे आवाज़ सुनी इस के लिए आपका आभार।
आप का गाज़ियाबाद.

By अनिल कुमार (पब्लिशर व एडिटर-इन-चीफ) : Thursday 23 नवंबर, 2017 12:49 PM