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बिना किसी हथियार के आपकी रक्षा करने वाले सेक्युरिटी गार्ड की कहानी

बिना किसी हथियार के आपकी रक्षा करने वाले सेक्युरिटी गार्ड की कहानी

गाज़ियाबाद। आप के आस पास बहुत सारे लोग और काम ऐसे होते हैं जिन के बिना हमारी जिंदगी रूकती नही बल्कि अपनी रफ़्तार पर चल रहती है। ऐसा ही एक काम है सुरक्षा गार्ड का। सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने वाले लोग रोज़ 12 घंटे की ड्यूटी बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के करते हैं और बिना किसी हथियार और सुरक्षा उपकरणों के हमारी आपकी सुरक्षा किया करते हैं।

इनको सबका सम्मान भी करना होता है और साथ साथ ही साथ सब पर नज़र भी रखनी होती है। इस कठिन काम को करने की एवज़ में ये लोग मात्र 8 से 10 हज़ार की पगार पाते हैं। आज आपको ऐसे ही एक गार्ड की जिंदगी से रूबरू कराते हैं जिसने इतनी कम पगार में भी अपने बच्चों को पढ़ाया लिखाया और उन्हें सम्मान से जीने लायक बनाया।

हमारे आज के हीरो 60 वर्षीय ओमप्रकाश (बदला हुआ नाम) शहर के एक एकेडमी स्कूल में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते हैं। ये मूलरूप से बिहार के निवासी हैं और 1976 में गाजियाबाद आये थे। गाँव में रोजगार के साधन न होने की वजह से इन्हें शहर पलायन करना पड़ा। गाँव में छोटी-मोटी खेती से ही गुजारा करना पड़ता था। शादी हो चुकी थी इसलिए परिवार की जिम्मेदारियों ने घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

यहाँ आने के बाद 1976 में ही ए एल टी सेंटर में मजदूरी करने लगे। इसके एवज में इन्हें महीने का 80 रुपया मिलता था। यहाँ कुछ सालों तक काम करने के बाद वनस्पति घी बनाने की फैक्ट्री में नौकरी करने लगे। एक दिन फैक्ट्री में छापा पड़ गया जिसके बाद यह बंद हो गयी। इसके बाद 2009 से एक स्कूल में गार्ड की नौकरी करने लगे जिसके एवज में इन्हें महीने का 8 हजार मिलता है। इनकी नौकरी पूरे 12 घंटे की है।

आधार कार्ड, राशन कार्ड, पहचान पत्र सबकुछ यहीं का बनवा रखा है क्यूंकि एक बार घर छोड़ने के बाद वापस बिहार में रोज़गार तलाशना इन्हें बहुत मुश्किल काम लगा। इनका बैंक खाता भी है जिसमें हर दो महीने में 2 से 3 हजार रूपये डाल देते हैं। राजनगर में 3 हजार देकर किराये के मकान में रहते हैं। ओमप्रकाश के तीन बच्चें हैं, दो बेटियों की शादी कर दी है और तीसरे बेटे को इंजीनियरिंग करा रहे हैं।

ओमप्रकाश बताते हैं कि इन्होने कभी भी अपनी गरीबी का असर अपने बच्चों पर नही होने दिया। पैसे बचाकर अपने सभी बच्चों को पढ़ाया और उन्हें समाज के साथ खड़े रहने के काबिल बनाया। बेटियों की शादी के बाद अब केवल बेटे के भविष्य की चिंता है। उसके इंजीनियर बनने के बाद ये चिंता भी खत्म हो जायेगी।

हमारा गाजियाबाद टीम द्वारा ओमप्रकाश से ये पूछने पर कि ये कभी अपने काम से बोर नही होते, इनका कहना था,“गार्ड की नौकरी करके हमे सम्मान महसूस होता है। यहाँ के छात्र और अध्यापक हमे प्रेम देते हैं। हमारे यहाँ रहने से स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं खुद को आसामाजिक तत्वों से सुरक्षित महसूस करती हैं। इनका कहना है कि भले ही मेरी तनख्वाह कम हो लेकिन ये सम्मान और प्यार पाकर खुद पर गर्व होता है” यहाँ के टीचर और अभिभावकों का भी यही कहना था की ओमप्रकाश के यहाँ रहने से हमारे बच्चे सुरक्षित हैं।

तो देखा आपने कि ओमप्रकाश जैसे लोग समाज की एक महत्व पूर्ण इकाई हैं। अपने बल पर सम्मान की जिंदगी जीने वाले ऐसे लोगों को थोड़ा सा सम्मान और प्यार देकर इन्हें और भी बेहतर महसूस कराया जा सकता है।

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