ताज़ा खबर :
prev next

मिलिए हॉट सिटी गाज़ियाबाद के 9 “निरक्षर” पार्षदों से, इस मामले में भी भाजपा है नंबर वन

मिलिए हॉट सिटी गाज़ियाबाद के 9 “निरक्षर” पार्षदों से, इस मामले में भी भाजपा है नंबर वन

गाज़ियाबाद | आज इक्कीसवीं सदी के भारत में जहां ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट होकर भी लाखों लोग बेरोजगार घूम रहे हैं, वहीं अभी भी एक पेशा ऐसा है जहां आप की शिक्षा के बारे में कोई कुछ नहीं पूछता है। जी हाँ, ठीक पहचाना, हम बात कर रहे हैं राजनीति की। हाल ही में सम्पन्न निकाय चुनावों में गाज़ियाबाद नगर निगम के 9 वार्डों की जनता ने ऐसे पार्षदों को चुना है जो आजादी के दशकों बाद भी अनपढ़ ही रहे हैं। आश्चर्य की बात है कि निर्वाचन आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार सबसे ज्यादा अनपढ़ पार्षद देने के मामले में भी भारतीय जनता पार्टी ही नंबर वन है। इन पार्षदों के नाम इस प्रकार हैं-

  • वार्ड नंबर 1 (बागु क्रिश्चन नगर) – द्रौपदी देवी (बहुजन समाजवादी पार्टी),
  • वार्ड नंबर 6 (दीन दयालपुरी) – माया देवी (भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस),
  • वार्ड नंबर 17 (सेवा नगर, हिंडन विहार) – देवेन्द्र (भारतीय जनता पार्टी),
  • वार्ड नंबर 27 (डूँड़ा हेड़ा) – ललित कुमार (भारतीय जनता पार्टी),
  • वार्ड नंबर 28 (राजीव कॉलोनी) – विभा देवी (भारतीय जनता पार्टी),
  • वार्ड नंबर 38 (अर्थला) – राजेश कुमारी (समाजवादी पार्टी),
  • वार्ड नंबर 57 (मकनपुर) – कपिल त्यागी (भारतीय जनता पार्टी),
  • वार्ड नंबर 82 (जवाहर पार्क) – वरीसा (बहुजन समाजवादी पार्टी),
  • वार्ड नंबर 98 (अहिंसा खंड) – राजेश कुमारी (समाजवादी पार्टी),

इनके अलावा 7 पार्षद ऐसे भी हैं जिनकी शिक्षा सिर्फ पाँचवीं क्लास तक ही है। एक पार्षद का काम बहुत ही ज़िम्मेदारी भरा होता है। क्षेत्र में विकास कार्यों के साथ न्याय व्यवस्था और निगम के कामों में भ्रष्टाचार आदि रोकने में भी इन पार्षदों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जाहिर है इन सभी “निरक्षर” पार्षदों को यह भी मालूम नहीं होगा कि भविष्य में वे जिन कागजों पर अंगूठा लगा कर अपनी सहमति देंगे उन पर क्या लिखा होगा।

इनमें से एक पार्षद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें तो यह भी पता नहीं की पार्षद की जिम्मेदारियाँ क्या होती हैं। उनके पति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, दुर्भाग्य से सीट अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हो गई उनके पति ने न जाने किन-किन कागजों पर अंगूठा लगवाकर उन्हें प्रत्याशी बना दिया। स्थानीय नागरिकों में पति की जाति के अधिक लोग थे और मोदी की लहर में वे चुनाव जीत गईं। अब सारा काम उनके पति ही देखेंगे।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि आजादी के दशकों बाद भी क्या कारण रहे होंगे की गाज़ियाबाद जैसे विकसित शहर में भी अनपढ़ लोगों गाज़ियाबाद की पढ़ी लिखी जनता खुशी-खुशी वोट देकर अपना प्रतिनिधि भी चुनती है। शायद इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि दुर्भाग्य से आज भी हमारी राजनीति सिर्फ जातिवाद पर ही टिकी है।

 

(व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी ख़बरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें
हमारा गाज़ियाबाद के एंड्राइड ऐप के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैंआप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो भी कर सकते हैं।