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बढ़ते प्रदूषण के चलते सांस के मरीजों से भरे शहर के अस्पताल

बढ़ते प्रदूषण के चलते सांस के मरीजों से भरे शहर के अस्पताल

गाज़ियाबाद। शहर में तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण से जनपद के लोगों की सेहत बिगड़ रही है। यही वजह है कि पिछले सप्ताह के मुकाबले पिछले दो-तीन दिनों से सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इन मरीजों में सांस, त्वचा, बाल और आंखों से जुड़ी दिक्कत वाले सबसे अधिक हैं।

जनपद के एमएमजी, संयुक्त जिला अस्पताल, गणेश अस्पताल, हीरालाल, यशोदा अस्पताल समेत कोलंबिया एशिया अस्पताल में सोमवार से दमा, सांस लेने में परेशानी और खांसी के मरीजों की संख्या में उछाल आया है। इन अस्पतालों की ओपीडी में सुबह आठ बजे से लेकर दोपहर दो बजे तक इलाज के लिए मरीजों की लंबी कतारें लगने लगी हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकारी अस्पतालों की ओपीडी का समय ढाई बजे तक करने की भी योजना बनाई जा रही है।

प्रदूषण बच्चों की कोमल त्वचा पर सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव डाल रहा है। प्रदूषण में बाहर निकलने से बच्चों की त्वचा पर लाल रंग के दाने, खुजली और रुखापन हो रहा है। यशोदा अस्पताल के त्वचा विशेषज्ञ सुब्रो भट्टाचार्जी ने बताया कि प्रदूषण सबसे ज्यादा बच्चों की त्वचा को नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को घर से बाहर न निकालने दें। वहीं हीरालाल अस्पताल की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. ईशा अग्रवाल ने बताया कि प्रदूषण से सभी लोगों की त्वचा को नुकसान पहुंच रहा है।

प्रदूषण के कारण त्वचा के कैंसर होने की भी संभावना है। इसीलिए लोग अपने घरों से पूरी तरह से खुद को ढक कर ही निकलें। मुंह पर मास्क लगाएं और ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं। आहर भी ऐसा ही लें जिसमें विटामिन-ए की मात्रा ज्यादा हो। त्वचा पर तेल या क्रीम जरूर लगाएं ताकि त्वचा रुखी न हो। उन्होंने बताया कि प्रदूषण से लोगों के बाल झड़ने व बालों में खुजली की भी समस्या बढ़ी है। ऐसे में बाल ढककर ही बाहर निकलें और बालों को साफ रखें।

संयुक्त जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि प्रदूषण से लोगों की आंखों में जलन और खुजली की शिकायत बढ़ी है। इसके अलावा आंख लाल होना और आखों से पानी निकलने की परेशानी लेकर 20 से 30 मरीज पिछले तीन दिनों में आ चुके हैं।

गणेश अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना शर्मा ने बताया कि प्रदूषण में गर्भवती महिलाएं घर से न ही निकलें तो ही जच्चा और बच्चा दोनों के सेहत के लिए अच्छा होगा। क्योंकि प्रदूषण के कारण गर्भवती महिलाओं को सांस लेने में दिक्कत होगी। ऐसे में उनके गर्भ में पल रहे बच्चे तक ऑक्सीजन रुक-रुक कर पहुंचने की संभावना है। इससे बच्चे के विकास व दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। ऑक्सीजन न मिलने से बच्चे की गर्भ में मौत भी हो सकती है।

 

 

 

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