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प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हरकतों से जिला प्रशासन भी हुआ लाचार

प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हरकतों से जिला प्रशासन भी हुआ लाचार

गाज़ियाबाद | जिला प्रशासन गाज़ियाबाद की जनता को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए दिन रात एक किए हुए है। प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों और बिल्डरों पर हर रोज़ कार्यवाही की जा रही है। बहुत से प्रतिष्ठानों को या तो सील कर दिया गया है या फिर उन पर भारी जुर्माना लगा दिया है। मगर इन सब से अलग, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी अपनी दुनिया में ही मस्त हैं और उनके काम करने का तरीका भी निराला ही है।
दरअसल गाज़ियाबाद में वायु प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए जिलाधिकारी रितु महेश्वरी ने एसडीएम के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी का काम प्रदूषण फ़ैलाने वाली इकाइयों को चिह्नित कर उन पर कार्यवाही करना था। यह कार्यवाही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से की जानी थी। अगर ऐसा होता तो भले ही गाज़ियाबाद की जनता को प्रदूषण से राहत मिलती, मगर बोर्ड के अधिकारियों को इन इकाइयों से मिलने वाली मोटी रकम पर अंकुश लग जाता।
गाज़ियाबाद की जनता के स्वास्थ्य को ताक पर रखकर अपनी काली कमाई को जारी रखने के लिए बोर्ड के रीजनल ऑफिस में बैठे अधिकारियों ने एक नायाब तरीका निकला। उन्होंने डीएम द्वारा गठित कमेटी की सिफारिशों को सीधे लागू करने के बजाए रिपोर्ट को लखनऊ ऑफिस में भेजकर शासन से संज्ञान लेने की संस्तुति कर दी। ऐसे में जिला प्रशासन लाचार है और लखनऊ से आने वाले आदेश की प्रतीक्षा कर रहा है। बता दें कि गाज़ियाबाद में प्रदूषण को नियंत्रित रखने की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वसुंधरा स्थित रीजिनल ऑफिस में बैठे अधिकारियों की है, मगर बोर्ड में व्याप्त भ्रष्टाचार और कर्मचारियों की कमी के चलते स्थिति अब नियंत्रण से बाहर हो चुकी है।


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