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खुद के बलबूते पढ़ाई करके अपने सपनों को पूरा कर रही है 21 साल की रचना

खुद के बलबूते पढ़ाई करके अपने सपनों को पूरा कर रही है 21 साल की रचना

गाज़ियाबाद। कहा जाता कि भगवान भी उसी की मदद करता है जो अपनी मदद स्वयं करता है। वैसे तो इस दुनियां में कई लोग दुखी हैं, क्या आमिर क्या गरीब। इस दुनियां में केवल वही लोग खुश हैं जिन्होंने दूसरों से खुद की तुलना करना छोड़ दिया हो या फिर यूँ कहें कि जिसने दूसरों पर निर्भर रहना छोड़ दिया हो।

हमारा गाज़ियाबाद की टीम आज आपको एक ऐसी लड़की के बारे में बताने जा रही है जिसने घर में रहकर न केवल ग्रैजुएशन किया बल्कि अपने दम पर अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर रही है। झारखण्ड के जमशेदपुर में एक मध्यम वर्ग के परिवार से संबंध रखने वाली 21 वर्षीय रचना ने न केवल छोटी उम्र में घर को संभाला बल्कि साथ ही  उसने अपनी पढ़ाई को भी जारी रखा।

रचना अपने छः भाई बहनों में चौथे नंबर पर है और वह बचपन से ही पढने में बहुत तेज है। वैसे तो इसके घर की जिम्मेदारी इसकी बड़ी बहनों को लेना चाहिए पर  सबकी शादी के बाद से घर की जिम्मेदारी रचना के सर पर तभी आ गई जब वह नवमीं कक्षा में थी। टीम से बात करते हुए रचना ने बताया कि किसी कारण से उसकी माँ घर में ज्यादा वक़्त नहीं दे पाती थी। जिसके कारण बड़े भाई, पिता और छोटी बहनों का दायित्व रचना को लेना पड़ा।

रचना ने बताया कि घर का सारा काम ख़त्म करने के बाद वह सिलाई सिखने चली जाती थी और उसके बाद जब भी उसे समय मिलता वह पढने बैठ जाया करती थी। इसी तरह काम करते हुए उसने दसवीं कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया और आगे की पढाई को चालू रखा। उम्र कम और काम ज्यादा होने के कारण उसने एक पल ये सोच लिया कि वह पढ़ाई छोड़ दे, लेकिन माँ-पापा के सपनों को पूरा करने के लिए उसे पढ़ना भी था।

रचना ने आगे अपने परिवार के बारे में बताते हुए कहा कि उसके माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए कुछ भी करने को तैयार थे।  इसलिए वह भी अपने पढ़ाई को नहीं छोड़ पाई । इसी तरह घर की जिम्मेदारियों को  निभाते हुए उसने ग्रैजुएशन किया। पढाई के प्रति उसके रुझान को देखते हुए उसके माता-पिता ने उसे उत्तराखंड के देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए भेज दिया।

वहां रचना ने पहले 6 महीने का समग्र स्वस्थ्य प्रबंधन का कोर्स किया फिर योग से एमए करने लगी।  उसे अपनी पढ़ाई के लिए घर से रुपये नहीं मांगना पड़े  इसलिए वह उसी विश्वविद्यालय में चिकित्सालय में स्टाफ के रूप में काम कर रही है।  इससे उसके जेब खर्च और पढाई का खर्च निकल जाता है। साथ ही वह बचे हुए रुपयों को भविष्य के लिए भी जमा कर रही है।

टीम ने रचना के माता-पिता भी बात की।  उनका कहना था कि उन्हें रचना पर गर्व है । वह अपने घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने सपनों को पूरा कर रही  है।

हमारा गाज़ियाबाद की टीम रचना के हौंसलो और उसकी क्षमता को सलाम करती है।

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By प्रगति शर्मा : Wednesday 22 नवंबर, 2017 14:41 PM