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25 सालों से सड़क किनारे रात गुजार कर खुद का घर बनाने की कोशिश में लगी हैं मूर्ति देवी

25 सालों से सड़क किनारे रात गुजार कर खुद का घर बनाने की कोशिश में लगी हैं मूर्ति देवी

गाज़ियाबाद। दुनिया में हर कोई अपने खुद के बसाये हुए घर में रहना चाहता है। भले ही उसकी कुटिया छोटी हो लेकिन इंसान का आशियाना ही उसकी जन्नत होता है। गाजियाबाद की सड़कों पर आपको ऐसे बहुतेरे मिलेंगे जो दूसरों के आगे हाँथ फैलाकर अपनी रात किसी पुल या ओवरब्रिज के किनारे इस ठंड में ठिठुरते हुए गुजार देते हैं।

आज हम आपको एक ऐसी महिला की जिन्दगी से रुबरु करवाने जा रहे हैं जो पिछले 25 साल से सड़क किनारे अपनी रात गुजारकर बिना दूसरों के आगे हाथ फैलाये खुद का घर बनाने के लिए छोटी सी दुकान चला रही है। ये कहानी है हापुड़ चुंगी चौराहे से मेरठ की ओर जाने वाले रास्ते पर सड़क किनारे अपनी रात गुजारने वाली मूर्ति देवी की।

मूर्ति देवी अपना घर छोड़कर 25 साल पहले कमाने की जुगत में गाजियाबाद आई थीं लेकिन हैरानी की बात है कि इनका आज तक खुद का आशियाना नही है। हापुड़ चुंगी चौराहे पर इंग्राहम इंस्टीट्यूट से सटी दीवार के किनारे इन्होने अपनी दुकान बना रखी है। दुकान पर दैनिक जरुरतों के साथ चाय भी बेचती हैं। इसी दुकान को अपना घर बना रखा है।

रात का गुजारा और दिन का भोर इनका यहीं होता है। मूर्ति देवी बताती हैं कि पिछले 25 सालों से चाय बेचकर अपना घर बनाने की जुगत में लगी हैं। मूर्ति देवी के चार बच्चे हैं और चारों की आर्थिक स्थिति ठीक नही है। एक लड़का पैर से दिव्यांग भी है। मूर्ति की जिन्दगी खुशी से बीत तो रही है लेकिन नगरनिगम और इंग्राहम इंस्टीट्यूट वाले आये दिन इन्हें दुकान हटाने के लिए तंग करते रहते हैं।

कई बार इनकी यह दुकान हटाई भी जा चुकी है लेकिन आर्थिक रुप से कमजोर मूर्ति फिर से यही दुकान लगा लेती हैं क्यूंकि यही इनकी रोजी है और यही आशियाना। घर मिलने की आस ने मूर्ति को बीमार तक कर दिया है लेकिन इनकी गरीबी और घर पाने की चाहत इनकी हिम्मत नही तोड़ पा रही है।

हमारा गाजियाबाद की टीम मूर्ति देवी के इस जज्बे को सलाम करती है। 

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