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महज 2 टीचरों पर टिका है प्राइमरी स्कूल के 250 बच्चों का भविष्य, कैसे सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था

महज 2 टीचरों पर टिका है प्राइमरी स्कूल के 250 बच्चों का भविष्य, कैसे सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था

गाज़ियाबाद। शहर के अधिकतर सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था चरमाराई हुई है। गाजियाबाद के बेसिक शिक्षा अधिकारी का ध्यान ग्रामीण क्षेत्र के कुछ बहुत स्कूलों पर तो है लेकिन नगर क्षेत्र के स्कूल इनकी आँखों से कहीं दूर हैं। बम्हेटा, हरसांव व अन्य क्षेत्रों के प्राइमरी स्कूल बीएसए की लापरवाही का ही सबूत हैं। योगी सरकार सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है लेकिन इनकी यथा स्थिति देखकर साफ जाहिर होता है कि शायद ही प्रदेश में सरकारी स्कूलों के भरोसे शिक्षा व्यवस्था सुधरे।

आर्थिक रुप से कमजोर परिवारों के बच्चों के भविष्य का एक मात्र सहारा प्राइमरी स्कूल ही होते हैं लेकिन शहर के लालकुआं स्थित प्राइमरी स्कूल की हालत बेहद दयनीय है। अचरज की बात है कि इस स्कूल के पहली से पांचवी तक के करीब ढाई सौ बच्चों का भविष्य महज दो टीचरों पर टिका हुआ है। कानूनन इन दो टीचरों की क्षमता इन बच्चों की जिम्मेदारी लेने की नही है। स्कूल में इनके अलावा अन्य टीचरों किन जरूरत है।

स्कूल के पड़ोस में ही रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि बच्चों के रोज के शोरगुल और हरकतों से वो तंग आ चुके हैं। ढाई सौ बच्चों को सिर्फ दो टीचर सम्हालने में असमर्थ हैं। इस स्कूल में ही पढ़ने वाले बच्चों ने बताया कि उन्हें सजा देने के नाम पर स्कूल में झाड़ू लगवाया जाता है। यहीं नही स्कूल परिसर की दीवार पिछले एक साल से टूटी हुई पड़ी है जिसको सही कराने की जहमत किसी अधिकारी ने उठाई है।

स्कूल के ही पीछे बच्चों के लिये दो शौचालय बने हुए हैं जिनकी जर्जर हालत बहुत कुछ कहानी बयाँ कर रही थी। पता चला कि पिछले पांच सालों से ये बंद पड़ा हुआ है। इसके अलावा स्कूल के रास्ते में ही स्थानीय लोगों ने डेयरी खोलकर हर रोज की गंदगी फैला रखी है। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि इस विद्यालय में सही पढ़ाई न होने के चलते उन्हें अपने बच्चों को पास के ही निजी स्कूल में महंगी फीस देकर पढ़ाना पड़ रहा है। बच्चो के भविष्य सुधारने का सही समय उनका बचपन ही होता है लेकिन जब भविष्य का निर्माण करने वाली संस्था ही उनकी अड़चन बनी रहेगी तो काम कैसे चलेगा।

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