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महज 13 की उम्र में सम्हाली पूरे परिवार की जिम्मेदारी, घरों में काम कर बना रही बेटियों का भविष्य

महज 13 की उम्र में सम्हाली पूरे परिवार की जिम्मेदारी, घरों में काम कर बना रही बेटियों का भविष्य

गाज़ियाबाद। कहा जाता है कि इन्सान अगर कोई काम दिल से करता है तो पूरी कायनात उसकी मदद को जुट जाती है। और वैसे भी किसी ने सही कहा है कि भगवान भी केवल उसी की मदद करता है जो अपनी मदद स्वयं करता है। संसार का कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, वो तो हमारी सोच है जो काम के साथ इन्सान को भी बाँट देती है। किसी के पास सरकारी नौकरी होने के बाद भी वह सुखी नहीं रह पाता और कोई कम पैसों में ही अपनी जिंदगी सुकून से जीता है।

हमारा गाजियाबाद की टीम आज आपको एक ऐसी महिला की की कहानी से रुबरु करवाने जा रही है जो दूसरों के घर में जूठे बर्तन साफ कर व झाड़ू लगाकर सुकून की जिंदगी जी रही है। वैसे तो उसकी जिंदगी में बहुत सारी परेशानियाँ हैं लेकिन उसके बावजूद भी उसके होंठो से हंसी कभी नहीं जाती। शास्त्रीनगर के महेन्द्रा एन्क्लेब में किराए के मकान में रहने वाली राधा इलाके के कुछ लोगों के घर  में झाड़ू-पोछा का काम करती है।

मूलरुप से राधा मध्य प्रदेश के सागर जिले के एक छोटे से गाँव की रहने वाली हैं। जो उम्र अपना भविष्य बनाने की होती है, सपने बुनने की होती है, खेलने की होती है उसी उम्र में महज 13 साल की होने के बाद इनकी शादी कर दी गई। छोटी सी उम्र और राधा के कन्धों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ चुकी थी.जमीन कम और अच्छी फसल नहीं हो पाने के कारण उनके घर का गुजर बसर नहीं हो पा रहा था। इसलिए उन्होंने गाँव के बाहर दूसरे शहर में रहकर घर के हालातों को सुधारने का निर्णय लिया।

वर्ष 2002 में राधा के पति अपने भाई व बहू के साथ गाज़ियाबाद आए थे । तभी से वे यहीं शास्त्रीनगर में अपने परिवार के साथ रहती हैं। घर में कमाई का कोई जरिया नहीं होने के कारण इनके पति को काफी मशक्कत करनी पड़ी । पहले उन्होंने ठेले पर चूड़ी व बिंदी बेचने का काम शुरू किया फिर सब्जी और आज उन्होंने अपना एक गैरेज खोल रखा है साथ ही कुछ रिक्शों को भाड़े पर दे दिया है ।

राधा के पति की एक खासियत है कि वे किसी भी प्रकार का कोई नशा नहीं करते साथ ही वे बमभोले के भक्त भी हैं । जहाँ राधा घरों में काम करके कमाए हुए रुपयों को अपने बच्चों के भविष्य को सुधारने और घर की परिस्थितियों को ठीक करने में लगाती है वहीँ इनके पति अपनी कमाई के रुपयों से घर का किराया देते हैं और कुछ रुपयों को जमा करते हैं । राधा के पति, देवर और देवरानी अपने बच्चों के साथ इसी तरह अपनी जिंदगी ख़ुशी से गुजार रही हैं । जमा किये रुपयों को साल में या छः महीने पर अपने गाँव में  बूढ़े माँ-बाप को भी दे आते हैं जिससे उनका भी गुजारा हो सके।

राधा ने बताया कि  पिछले तीन साल से उसके पेट में पथरी है लेकिन उसके इलाज के लिए उसके पास उतना न समय है और न उतना पैसा। इसके बावजूद भी वह अपना पूरा ध्यान बच्चों के भविष्य को सुधरने में लगा रही है। राधा की ये कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने पति के साथ कदम से कदम मिलाकर अच्छी-बुरी परिस्थितियों में नहीं चल पाती और जिन्दगी भर ग्रह क्लेश से जूझती रहती हैं।

हमारा गाज़ियाबाद की टीम राधा के द्वारा किये जा रहे सराहनीय कार्यों व उसकी क्षमता को  सलाम करती है। 

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