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शहर के पप्पू

पिछले कई दिनों से हम अपने न्यूज़ पोर्टल, सोशल मीडिया और व्हाट्स एप ग्रुप्स के माध्यम से “शहर के पप्पू” शीर्षक के माध्यम से शहर की जनता, नेताओं और अधिकारियों को जगाने में लगे हैं। हमारे इस अभियान में सैंकड़ों नहीं बल्कि हजारों शहरवासी बढ़ चढ़ के भाग ले रहे हैं। हमारे जागरूक गाज़ियाबादी हमें शहर के अलग-अलग स्थानों से पप्पुओं के चित्र भेज रहे हैं और अपने बहुमूल्य व व्यवहारिक सुझाव भी दे रहे हैं। कुछ लोगों ने अपनी गलतियां भी मानी और गलती करने के पीछे अपनी मजबूरी भी हमें बताई। बहुत से लोगों ने भविष्य में पप्पू न बनने का संकल्प भी लिया।

क्या आपको भी लगता है कि शहर के लोग यदि ठान लें कि हमें एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनना है तो फिर शासन-प्रशासन भी चुस्त-दुरुस्त हो जायेगा। हमारा शहर और शहरवासी भला किसी और शहर या उसके निवासियों से किसी भी हालत में कम हैं क्या? हमारे शहर में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं। हमारे बीच एक से बढ़कर एक नगीना रहता है। हमारे युवा, नारी शक्ति, विद्यार्थी, प्राध्यापक, रिटायर्ड अधिकारी और कर्मचारी, डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, बैंकर्स, अधिवक्ता, व्यापारी और उद्यमी क्या नहीं कर सकते?

हम लोग अपने-अपने क्षेत्रों में कामयाब और कारगर हैं तो अपने शहर के रूपांतरण में हम भला किसी से पीछे क्यूँ रहें? हम सब को नहीं तो अधिकांश लोगों को अच्छे से पता है कि क्या सही है और क्या गलत। हमारे किन कामों से शहर और समाज परेशान होता है और किन कामों से शहर वासियों का जीवन बेहतर होता है। अपनी ताकत और कमजोरियों से भी हम बखूबी वाकिफ हैं तो फिर हमें बेहतर और सफल होने से भला कौन रोक सकता है?

तो क्या आज से हम ये सोचना बंद कर सकते हैं कि “अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता” या “शहर की हर शाख पर उल्लू बैठा है” या “जब सब नियम तोड़ रहे हैं तो हम क्यों न तोड़ें” या “हमारे अकेले के सुधारने से भला क्या फर्क पड़ेगा? और ऐसी ही अन्य बातें जिन्हें सोच कर हम भी गलत तरीके अपना लेते हैं। क्या ये नहीं हो सकता कि हम खुद भी नियमों का पालन करें और अपने साथ वालों को भी ये शिक्षा दें। जैसा शहर हमारे बाप-दादा ने हमें दिया है हम उससे बेहतर शहर अपने बच्चों को दें क्या यह हमारी जिम्मेदारी नहीं? क्यों हमारे नवजात बच्चे दम घोंटू हवा में सांस लेने को मजबूर हों?

ये सब हो सकता है और हो भी रहा है। बस जरूरत है कुछ और लोगों की जो आगे आयें और संकल्प लें कि मैं अपने शहर और शहर वासियों से प्यार करता हूँ और इसलिए मैं अपने शहर को एक बेहतर शहर बनाने की शुरुआत कर रहा हूँ। आज सुधरेगा तो कल अपने आप अच्छा हो जायेगा। इसलिए हम सब मिलकर “आज” को बेहतर बनाने के लिए अपना योगदान अवश्य दें। आप ऐसा ही करेंगे,

इसी आशा के साथ,

आपका अपना
अनिल कुमार

By अनिल कुमार (पब्लिशर व एडिटर-इन-चीफ) : Thursday 23 नवंबर, 2017 12:58 PM